० तीन साल से फरार चल रहे पूर्व कोषाध्यक्ष जांच एजेंसी के सामने पहुंचे, पूछताछ जारी
रायपुर, 08 जुलाई (आरएनएस)। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब, कोल लेवी और कस्टम मिलिंग मामलों में नामजद कांग्रेस नेता -रामगोपाल अग्रवाल- को आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा ने हिरासत में लिया है। रामगोपाल अग्रवाल कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष और नान (नागरिक आपूर्ति निगम) के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार वे पिछले करीब तीन वर्षों से फरार थे और उनकी तलाश की जा रही थी।
जानकारी के अनुसार, कस्टम मिलिंग प्रोत्साहन घोटाले की जांच के सिलसिले में ईओडब्ल्यू ने उन्हें समन जारी किया था। इससे पहले मंगलवार को जांच एजेंसी ने उनके पुत्र -वैभव अग्रवाल- से कई घंटों तक पूछताछ की थी। इसके बाद बुधवार को रामगोपाल अग्रवाल स्वयं ईओडब्ल्यू कार्यालय पहुंचे, जहां उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की गई।
कस्टम मिलिंग घोटाला क्या है?
आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा के अनुसार, वर्ष -2015 से 2023- के बीच धान की कस्टम मिलिंग के लिए राइस मिलर्स को दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि में कथित अनियमितताएं की गईं। जांच एजेंसी का आरोप है कि नियमों का उल्लंघन कर चुनिंदा राइस मिलर्स को अनुचित लाभ पहुंचाया गया, जिससे करीब -127 करोड़ रुपये- का घोटाला हुआ। इस मामले में तत्कालीन अधिकारियों, राइस मिलर्स और अन्य संबंधित लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। हालांकि इन आरोपों की न्यायिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और मामला जांचाधीन है।
कोल लेवी घोटाला क्या है?
प्रवर्तन निदेशालय और ईओडब्ल्यू के अनुसार, वर्ष -2020 से 2022- के दौरान कोयला परिवहन और खनन कारोबार से जुड़े लोगों से प्रति टन के हिसाब से कथित तौर पर अवैध वसूली की गई। जांच एजेंसियों का दावा है कि इस नेटवर्क के माध्यम से करीब -540 करोड़ रुपये- की अवैध लेवी वसूली गई। मामले में कई आईएएस अधिकारी, कारोबारी, बिचौलिए और राजनीतिक रूप से जुड़े लोगों के नाम सामने आए हैं। हालांकि इन आरोपों पर अंतिम न्यायिक निर्णय अभी नहीं हुआ है।
प्तप्तप्त शराब घोटाले की जांच भी जारी
छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाले में भी रामगोपाल अग्रवाल का नाम जांच के दायरे में है। ईडी और ईओडब्ल्यू के अनुसार, वर्ष -2019 से 2022- के बीच सरकारी शराब बिक्री व्यवस्था में कथित सिंडिकेट बनाकर अवैध शराब की बिक्री, कमीशनखोरी और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया गया। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इस पूरे नेटवर्क के जरिए करीब -3,200 करोड़ रुपये- का अवैध घोटाला हुआ। इस मामले में कई आईएएस अधिकारियों, आबकारी विभाग के अधिकारियों, कारोबारियों और राजनीतिक रूप से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। हालांकि सभी आरोपों की न्यायिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और मामले की जांच तथा अदालती प्रक्रिया जारी है।
ईओडब्ल्यू द्वारा रामगोपाल अग्रवाल से पूछताछ जारी है। जांच एजेंसी इस मामले से जुड़े वित्तीय लेनदेन, दस्तावेजों और अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
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