मुजफ्फराबाद,09 जुलाई। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में राजनीतिक और जनआंदोलन एक बार फिर तेज हो गया है। जम्मू-कश्मीर संयुक्त अवामी कार्रवाई समिति (जेएएसी) ने पाकिस्तान सरकार को 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी है कि यदि उसकी 38 सूत्रीय मांगें नहीं मानी गईं तो 9 जुलाई से विरोध-प्रदर्शनों का बड़ा और अंतिम चरण शुरू किया जाएगा। इस बीच, समिति और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर सरकार के बीच हुई वार्ता भी बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो गई।
जेएएसी ने कहा है कि यदि सरकार ने तय समय के भीतर मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो मुजफ्फराबाद तक विशाल विरोध मार्च निकाला जाएगा। संगठन ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के लोगों के साथ-साथ विदेशों में रह रहे कश्मीरियों से भी आंदोलन में शामिल होने की अपील की है। समिति ने इस्लामी सहयोग संगठन, संयुक्त राष्ट्र तथा अंतरराष्ट्रीय समाचार माध्यमों से भी क्षेत्र की स्थिति पर नजर रखने का आग्रह किया है।
प्रदर्शनकारियों की सबसे बड़ी मांग पाकिस्तान में बसे कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 विधानसभा सीटों को समाप्त करने की है। जेएएसी का आरोप है कि इन सीटों के माध्यम से इस्लामाबाद पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की राजनीति पर अपना प्रभाव बनाए रखता है।
समिति के अनुसार, शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटें पाकिस्तान में रहने वाले लगभग 43 लाख मतदाताओं का प्रतिनिधित्व करती हैं, जबकि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की 33 सामान्य विधानसभा सीटें वहां के लगभग 33 लाख मतदाताओं का प्रतिनिधित्व करती हैं। संगठन का कहना है कि यह व्यवस्था स्थानीय जनता के राजनीतिक अधिकारों को प्रभावित करती है।
जेएएसी ने सरकार को 38 सूत्रीय मांगपत्र भी सौंपा है। इसमें जलविद्युत परियोजनाओं की नीतियों की समीक्षा, बढ़ती महंगाई से राहत के लिए आटा जैसी आवश्यक वस्तुओं पर सब्सिडी, बिजली की दरों में कमी तथा स्थानीय संसाधनों पर स्थानीय लोगों के अधिकार सुनिश्चित करने जैसी मांगें शामिल हैं।
समिति का कहना है कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में उत्पादित बिजली का लाभ स्थानीय लोगों को नहीं मिल रहा है और उन्हें उसी बिजली के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है।
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल सहित कई संस्थाओं ने पाकिस्तान पर आंदोलन को दबाने और असहमति की आवाजों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने का आरोप लगाया है। लंदन, ऑकलैंड और ब्रैडफोर्ड सहित कई शहरों में भी पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की स्थिति को लेकर विरोध-प्रदर्शन हुए हैं।
ब्रिटेन के सांसद इमरान हुसैन ने पाकिस्तान सरकार से क्षेत्र में लगाए गए प्रतिबंध हटाने, संचार सेवाएं बहाल करने तथा नागरिकों के अधिकारों का सम्मान करते हुए शांतिपूर्ण वार्ता का रास्ता अपनाने की अपील की है।
संयुक्त अवामी कार्रवाई समिति के वरिष्ठ नेता उमर नजीर कश्मीरी ने कहा कि बढ़ते दबाव के बावजूद आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पडऩे पर आंदोलनकारी अपने अधिकारों की रक्षा के लिए हर प्रकार का बलिदान देने को तैयार हैं। उनका कहना था कि इतिहास ही तय करेगा कि मौजूदा परिस्थितियों के लिए कौन जिम्मेदार था और पीडि़त कौन था।
समिति के नेता सरदार अमन खान ने भारत के साथ मानवीय स्तर पर सहयोग बढ़ाने की मांग की है। उन्होंने नियंत्रण रेखा पर आवाजाही आसान करने और आवश्यकता पडऩे पर मानवीय सहायता उपलब्ध कराने की अपील की। उनका कहना था कि यदि हालात और बिगड़ते हैं तो आम नागरिकों के पास सुरक्षित विकल्प उपलब्ध होना चाहिए। उन्होंने राशन और आवश्यक वस्तुओं की कमी का भी उल्लेख करते हुए सहायता की आवश्यकता जताई।
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