नई दिल्ली,10 जुलाई(आरएनएस)। भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच 13 जुलाई को कोर्ट खुलने पर अयोध्या राम मंदिर दान चोरी, हेराफेरी और गबन से जुड़ी तीन याचिकाओं पर सुनवाई करेगी.
दो याचिकाएं – वकील अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव द्वारा और वकील सत्यम सिंह राजपूत के माध्यम से राजद सांसद सुधाकर सिंह द्वारा दायर याचिका में सीबीआई जांच की मांग की गई है.
उन्होंने तर्क दिया कि निष्पक्ष, पारदर्शी और बिना भेदभाव के जांच के लिए योगी सरकार, उत्तर प्रदेश पुलिस और राज्य एसआईटी पर भरोसा नहीं किया जा सकता. सुप्रीम कोर्ट की वेकेशन बेंच ने पिछले महीने इस मामले में तत्काल सुनवाई से मना कर दिया था, लेकिन 13 जुलाई को कोर्ट के दोबारा खुलते ही इसे सूचीबद्ध करने का भरोसा दिया था. राजद सांसद द्वारा दायर याचिका में अयोध्या राम मंदिर में कथित दान चोरी की सीबीआई जांच की मांग की गई थी.
याचिका में मंदिर ट्रस्ट को यह निर्देश देने की भी मांग की गई कि वह 5 फरवरी, 2020 को इसके गठन के बाद से मिले पैसे और कीमती सामान के रूप में सभी दान का पूरा ब्योरा अदालत के सामने रखे.
याचिका में कहा गया है कि यह श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट, अयोध्या यूपी के प्रशासन, लाखों भक्तों के चढ़ावे की सुरक्षा और देश के सबसे प्रतिष्ठित धार्मिक संस्थानों में से एक में लोगों के भरोसे को बनाए रखने से जुड़े बहुत जरूरी सार्वजनिक महत्व के मुद्दे उठाता है.
याचिका में इस बात पर जोर दिया गया कि भक्तों के चढ़ावे से जुड़े आरोपों की चल रही जांच निष्पक्ष, स्वतंत्र हो और देश का भरोसा जगाए, इसके लिए संवैधानिक सुरक्षा उपायों की जरूरत है.
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से अपील की गई है कि वह श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को निर्देश दे कि वह ट्रस्ट के बनने के बाद से मिले सभी दान, चढ़ावे और योगदान का पूरा ब्यौरा दे, जिसमें कैश दान, बैंक ट्रांसफर, डिजिटल पेमेंट, विदेशी योगदान, दान, सोना, चांदी और दूसरी कीमती चीजें शामिल हों, साथ ही उनके हिसाब-किताब, रखने और इस्तेमाल की जानकारी भी हो.
दो वकीलों, अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव द्वारा दायर दूसरी याचिका में तर्क दिया गया कि एक संस्था द्वारा निधियों की अपारदर्शी हैंडलिंग, जो एक प्रत्ययी क्षमता में काम करती है, सीधे तौर पर अनगिनत भक्तों और आम जनता के विश्वास, भावनाओं और भरोसे को कमजोर करती है, जिन्होंने जन्मभूमि पर भगवान श्री राम मंदिर के निर्माण के लिए स्वेच्छा से योगदान दिया है.
याचिका में कहा गया है, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से संबंधित कथित लापता धन, लेखांकन अनियमितताओं और अन्य वित्तीय विसंगतियों से संबंधित आरोपों की सत्यता या अन्यथा का पता केवल एक व्यापक, स्वतंत्र और पेशेवर जांच के जरिए ही लगाया जा सकता है, जो विशेष विशेषज्ञता, पर्याप्त संसाधनों, तकनीकी क्षमताओं और जटिल वित्तीय और आर्थिक अपराधों की जांच के लिए एक स्थापित संस्थागत ढांचे से युक्त एजेंसी द्वारा की जाए.
वकील नरेंद्र कुमार गोस्वामी की तरफ से दायर की गई तीसरी याचिका में मांग की गई कि अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर में श्री राम लला विराजमान को भक्तों द्वारा दिया गया चढ़ावा, जिसमें कैश, सोना, चांदी, ज्वेलरी, कीमती सामान और डिजिटल दान शामिल हैं, एक पवित्र ट्रस्ट प्रॉपर्टी है, जिसे पारदर्शी, उत्तरदायी और जिम्मेदार होने की जरूरत है.
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