रायपुऱ, 11 जुलाईं (आरएनएस)। कांग्रेस कार्यसमिति एआईसीसी सदस्य कमलेश्वर पटेल ने कहा, मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम करोड़ों भारतीयों की आस्था, संस्कृति और नैतिक चेतना के प्रतीक हैं। देश के कोने-कोने से गरीब, किसान, मजदूर, महिलाएं और श्रद्धालु अपनी मेहनत की कमाई, अपने गहने, अपनी बचत और अपनी श्रद्धा लेकर राम मंदिर निर्माण के लिए आगे आए। भाजपा, आरएसएस, विश्व हिंदू परिषद और संघ परिवार के संगठनों ने लगभग तीन दशकों तक भगवान राम के नाम पर राजनीति की, देश के गरीब व मध्यम वर्ग से राम के नाम पर चंदा एकत्र किया और इसी आंदोलन के आधार पर सत्ता प्राप्त की।
प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन रायपुर में एक पत्रकार वार्ता में कहा, आज वही करोड़ों रामभक्त यह पूछने को मजबूर हैं कि भगवान राम के नाम पर जुटाया गया चंदा और चढ़ावा आखिर किसके संरक्षण में लूटा गया? यह केवल आर्थिक घोटाला नहीं है। यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, विश्वास और भावनाओं के साथ किया गया घोर विश्वासघात है।
तीन बड़े सवाल
जब ट्रस्ट का गठन प्रधानमंत्री की देखरेख में हुआ, तो इस घोटाले की जवाबदेही कौन लेगा? अगर सब कुछ ठीक था, तो चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे क्यों हुए? अगर कुछ गलत नहीं हुआ, तो सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र जांच से डर किस बात का है?
अब तक सामने आए तथ्य अत्यंत गंभीर
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार किए जा चुके हैं। यह स्वयं इस बात का संकेत है कि मामला सामान्य प्रशासनिक त्रुटि का नहीं, बल्कि एक बड़े घोटाले का है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने स्वयं सार्वजनिक रूप से बयान दिए हैं, जबकि ट्रस्ट की वित्तीय निगरानी, पारदर्शिता और संपत्तियों की सुरक्षा की सर्वोच्च जिम्मेदारी उन्हीं की थी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ट्रस्ट के विशिष्ट आमंत्रित सदस्य गोपाल राव (गोपाल नगरकोटे) को हटाए जाने और उनकी स्थिति को लेकर भी गंभीर भ्रम और विरोधाभास सामने आए हैं। आरएसएस के पूर्वी उत्तर प्रदेश प्रभारी कृष्णमोहन को ट्रस्ट का नया महासचिव बनाया गया है, जबकि उन पर पूरे प्रकरण को दबाने और लीपापोती करने के आरोप सार्वजनिक रूप से लगाए जा चुके हैं। ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे और शीर्ष नियुक्तियों में प्रधानमंत्री कार्यालय की सक्रिय भूमिका रही है। ऐसे में केंद्र सरकार अपनी जवाबदेही से स्वयं को अलग नहीं कर सकती। एसआईटी अब राम मंदिर के बड़े आयोजनों के खर्चों की भी जांच कर रही है।
कब कितना खर्च
22 जनवरी 2024 की प्राण-प्रतिष्ठा पर लगभग 113 करोड़ खर्च किए गए। 25 नवंबर 2025 के ध्वजारोहण कार्यक्रम पर लगभग10.12 करोड़ खर्च किए गए। फर्जी रसीदों, नकद चढ़ावे, लेखा-जोखा और कथित हेराफेरी के अनेक आरोप सामने आए हैं। छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई की जा रही है, जबकि ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों की जवाबदेही अब तक तय नहीं हुई है। यही नहीं, भाजपा-आरएसएस ने न प्रभु श्री राम के चंदे को छोड़ा और ना ही अब उत्तराखंड के श्रीबद्रीनाथ मंदिर से जुड़े हालिया दान घोटाले ने भी यह प्रश्न खड़ा किया है कि कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस इस सच्चाई पर पर्दा नहीं डाल सकती कि सीसीटीवी निगरानी, बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था और प्रभावशाली लोगों के संरक्षण के बिना इतने बड़े स्तर पर यह कथित घोटाला संभव नहीं हो सकता। टुकड़ों-टुकड़ों में इस्तीफे, छोटे कर्मचारियों की गिरफ्तारी और सीमित कार्रवाई केवल लीपापोती का प्रयास प्रतीत होते हैं, ताकि बड़ी मछलियों तक आंच न पहुंचे।
कांग्रेस की मांग
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस पूरे प्रकरण पर मौन क्यों हैं? क्या चंपत राय, अनिल मिश्रा, गोविंद देव गिरी, गोपाल राव और ट्रस्ट के अन्य शीर्ष पदाधिकारी इस पूरे प्रकरण में अपनी जवाबदेही से बच सकते हैं? जब पूरा ट्रस्ट कटघरे में है, तो केवल छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई क्यों?
क्या डबल इंजिन सरकार दोषियों को बचा रही है? क्या केंद्र सरकार सच्चाई सामने आने से डर रही है?
एसएस
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