तेहरान, 12 जुलाई। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरान में अब होर्मुज स्ट्रेट को लेकर मतभेद शुरू हो गए हैं. एक ओर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के कट्टरपंथी कमांडर हर कीमत पर होर्मुज पर कब्जा जमाए रखने और अमेरिका के खिलाफ लड़ाई जारी रखने के पक्ष में हैं तो वहीं ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान अमेरिकी सरकार से बातचीत करके समाधानन ढूंढना चाहते हैं.
सौफान सेंटर के वरिष्ठ विश्लेषक केनेथ कैंट्जमैन के अनुसार, ईरान के अंदर इस वक्त दो अलग-अलग सोच काम कर रही है. उनका कहना है कि आईआरजीसी के शीर्ष कमांडर और कट्टरपंथी नेताओं का मानना है कि होर्मुज पर कंट्रोल जमाए रखना ईरान की सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत है. आईआरजीसी सिर्फ होर्मुज पर पकड़ ही बनाकर नहीं रखना चाहता बल्कि पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत का बदलना भी लेना चाहता है. आईआरजीसी का मानना है कि अमेरिका को ऐसा जवाब दिया जाए कि अमेरिका भविष्य में कभी भी ईरान पर हमला करने की सोचे भी नहीं.
वहीं, ईरान के निर्वाचित राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ जैसे नेता युद्ध को आगे बढ़ाने की बजाए बातचीत के जरिए समाधान निकालने के पक्ष में हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि ईरानी सरकार चाहती है कि ओमान की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच फिर से वार्ता शुरू हो और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर सहमति बनाई जाए.
इसके अलावा, अमेरिका ने ये भी साफ किया है कि होर्मुज स्ट्रेट का खुला रखना अमेरिका और रणनीतिक प्राथमिकताओं में शामिल है. वॉशिंगटन का कहना है कि दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल व्यापार के लिए इसी समुद्री मार्ग से आता-जाता है. इसे बंद करने की हर एक कोशिश का कड़ा जवाब दिया जाएगा.
एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर ईरान का कट्टरपंथी गुट अपने रुख पर अड़ा रहता है और होर्मुज स्ट्रेट को बंद रखने की नीति जारी रहती है तो अमेरिका की ओर से बड़े सैन्य हमले हो सकते हैं. अगर पेजेशकियान सरकार आईआरजीसी पर दबाव बनाकर उसे पीछे हटाने के लिए राजी कर लेता है तो ओमान की मध्यस्थता में एक नया समझौता हो सकता है.
००
Login
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

