बगहा,13 जुलाई(आरएनएस)। बिहार के पश्चिम चंपारण में बगहा कोर्ट ने सोमवार को मानव तस्करी के एक गंभीर मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दो दोषियों को आजीवन कारावास की सजा दी है. साथ ही एक-एक लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है. बगहा जिला एवं अपर सत्र-न्यायाधीश (चतुर्थ) मानवेंद्र मिश्र की अदालत के इस निर्णय से मानव तस्करों को स्पष्ट संदेश गया है कि ऐसे मामलों में भी सख्त से सख्त सजा मिलेगी.
नौरंगिया थाना कांड संख्या 05/2026 में पश्चिम बंगाल के रहने वाले नियोति देवी (43 वर्ष) और उसके बेटे नागेश भुइयां (19 वर्ष) को दोषी करार देते हुए यह सजा सुनाई गई है. जुर्माना नहीं देने पर दोनों को तीन वर्ष का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा.
अभियोजन के अनुसार 22 जनवरी 2026 को मानव व्यापार निरोधक इकाई को सूचना मिली थी कि एक महिला और एक युवक तीन नाबालिग बच्चियों को बहला-फुसलाकर पश्चिम बंगाल ले जा रहे हैं. सूचना पर नौरंगिया थाना पुलिस और मानव व्यापार निरोधक इकाई ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपितों को हल्दिया चट्टी के पास तीनों बच्चियों के साथ गिरफ्तार कर लिया.
पूछताछ में सामने आया कि बच्चियों को पश्चिम बंगाल ले जाकर बेचने की साजिश थी. आरोपियों के पास से दो मोबाइल फोन और बगहा से आसनसोल तक के रेलवे टिकट भी बरामद किए गए थे.
मामले की सुनवाई स्पीडी ट्रायल के तहत हुई. 22 जून से गवाही शुरू हुई और 9 जुलाई को अदालत ने दोनों को दोषी ठहराया. इसके बाद 13 जुलाई को सजा सुनाई गई. अभियोजन ने पांच गवाहों और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर आरोप सिद्ध किया. अदालत ने माना कि तीनों बच्चियां नाबालिग थीं और उन्हें मानव तस्करी के उद्देश्य से बिहार से पश्चिम बंगाल ले जाया जा रहा था.
अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता जितेंद्र भारती ने कहा कि अपने फैसले में अदालत ने कहा कि मानव तस्करी केवल एक व्यक्ति के खिलाफ अपराध नहीं, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 21 और 23 में प्रदत्त जीवन गरिमा और स्वतंत्रता के अधिकार पर गंभीर हमला है. मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय ने दोनों दोषियों को भारतीय न्याय संहिता की धारा 143/5 के तहत आजीवन कारावास और एक-एक लाख रुपये के जुर्माने से दंडित किया.
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