0 स्कूल शिक्षा सचिव को नोटिस जारी, नकल कराने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई का मांगा जवाब; अक्टूबर के पहले सप्ताह में होगी अगली सुनवाई
बिलासपुर, 14 जुलाई (आरएनएस)। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महासमुंद जिले के भंवरपुर स्थित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय में 12वीं बोर्ड परीक्षा के दौरान सामने आए नकल कांड और छात्रा द्वारा किए गए स्टिंग ऑपरेशन को गंभीरता से लिया है। मीडिया में प्रकाशित खबरों और मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रमेश सिन्हा एवं जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने स्वत: संज्ञान लेते हुए इसे जनहित याचिका (PIL) के रूप में सुनवाई के लिए स्वीकार किया है।
अदालत ने छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा सचिव को नोटिस जारी कर पूरे मामले में शपथपत्र के साथ जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने यह भी पूछा है कि मीडिया में जिन शिक्षकों के नकल कराने में संलिप्त होने की बात सामने आई है, उनके खिलाफ अब तक क्या दंडात्मक कार्रवाई की गई है।
सुनवाई के दौरान शिक्षा विभाग की ओर से अदालत को बताया गया कि मामले की विभागीय जांच जारी है और तीन महीने के भीतर जांच पूरी कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मामले की अगली सुनवाई अक्टूबर माह के पहले सप्ताह में निर्धारित की गई है।
छात्रा ने स्टिंग कर उजागर किया था नकल का खेल
यह मामला महासमुंद जिले के बसना विकासखंड के रोहिणी गांव की छात्रा नीता जगत से जुड़ा है। सरस्वती शिशु मंदिर की छात्रा नीता का परीक्षा केंद्र स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय, भंवरपुर में बनाया गया था।
परीक्षा के दौरान छात्रा ने देखा कि परीक्षा केंद्र में शिक्षक स्वयं विद्यार्थियों को उत्तर लिखवा रहे थे और मोबाइल फोन का खुलेआम उपयोग किया जा रहा था। इस पूरे घटनाक्रम का उसने गुप्त रूप से वीडियो रिकॉर्ड कर स्टिंग ऑपरेशन किया। छात्रा का कहना था कि यदि इस तरह नकल कराई जाएगी, तो ईमानदारी से पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के साथ अन्याय होगा।
विरोध करने पर प्रताडऩा का आरोप
छात्रा का आरोप है कि नकल का विरोध करने और सबूत जुटाने के बाद उसे सुरक्षा देने के बजाय केंद्र अधीक्षक और स्कूल के प्राचार्य ने फटकार लगाई। इतना ही नहीं, उसे मानसिक रूप से प्रताडि़त किया गया और अंग्रेजी की परीक्षा के दौरान उसकी डेस्क पर पहले से उत्तर लिखकर उसे झूठे मामले में फंसाने की कोशिश भी की गई।
लगातार मानसिक दबाव के कारण छात्रा की तबीयत बिगड़ गई, लेकिन उसने हार नहीं मानी। जिला स्तर पर सुनवाई नहीं होने पर वह स्वयं रायपुर स्थित माध्यमिक शिक्षा मंडल कार्यालय पहुंची और पूरे मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई।
अब हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद इस मामले में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की उम्मीद बढ़ गई है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा प्रणाली की निष्पक्षता से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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