काठमाण्डू,14 जुलाई। नेपाल में पिछले जेन-जी आंदोलन को अभी एक साल भी नहीं हुआ है कि युवा फिर सड़कों पर उतर आए हैं। पिछले आंदोलन के बल पर सत्ता में आए प्रधानमंत्री बालेन शाह अब खुद युवाओं के गुस्से का शिकार हो रहे हैं। बीते सप्ताहांत पूरे देश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए, जिसमें विपक्षी नेताओं और प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री बालेन का इस्तीफा मांगा। वहीं, 3 लोग आत्मदाह कर चुके हैं, जिनमें 2 की मौत हो गई है।
काठमांडू में पार्किंग को लेकर पुलिस से झड़प के बाद गणेश नेपाली नामक ड्राइवर ने खुद को आग लगा ली। इलाज के लिए दिल्ली लाए जाने से पहले ही गणेश की मौत हो गई।
इसके बाद राजधानी में प्रदर्शन शुरू हो गए। सैकड़ों युवा न्याय की मांग करते हुए सड़कों पर उतर आए। युवाओं ने बालेन शाह से प्रधानमंत्री पद छोडऩे की मांग की। बालेन के खिलाफ संसद में भी विरोध तेज हो गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, गणेश बार-बार जुर्माना लगने और मोटरसाइकिल लॉक होने की घटनाओं से परेशान थे। उन्होंने अपने रिश्तेदार को बताया था कि अधिकारियों ने उन पर 1,000 रुपये का जुर्माना लगा दिया।
परिवार का कहना है कि गणेश ने मरने से पहले अधिकारियों को दोषी ठहराया था।
घटना वाले दिन भी पुलिस उनकी मोटरसाइकिल को जब्त कर ले जा रही थी। इसी दौरान उन्होंने मोटरसाइकिल से पेट्रोल निकाला और खुद को आग लगा ली।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस घटना के बाद 3 दिनों के भीतर 2 और लोगों ने आत्मदाह की कोशिश की।
10 जुलाई को सरलाही में 35 वर्षीय विवेक मंडल ने आत्मदाह का प्रयास किया। गंभीर स्थिति में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है।
11 जुलाई को 45 वर्षीय अश्विन राउत ने काठमांडू के बुद्धनगर में खुद को आग लगा ली। इलाज के दौरान बीर अस्पताल में उनका निधन हो गया।
विपक्षी सांसदों ने सरकार पर त्रासदी को रोकने में विफल रहने और स्थिति को ठीक से न संभालने का आरोप लगाया।
सांसद बसाना थापा ने कहा, जब एक युवक ने राज्य के आतंक के चलते खुद को आग लगा ली, तब भी सरकार मूकदर्शक बनी रही। अब समय आ गया है कि बालेन अपना अंधकार का चश्मा उतार दें।
सांसद ऐन बहादुर महार ने कहा, नागरिकों को आत्मदाह करने के लिए मजबूर करने वाली परिस्थितियों के लिए सरकार जिम्मेदार है।
पिछले साल नेपाल में हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए थे। सोशल मीडिया पर प्रतिबंध, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और अर्थव्यवस्था की स्थिति को लेकर युवा सड़कों पर उतर आए थे। इन प्रदर्शनों में 70 से ज्यादा लोग मारे गए थे और तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी ओली को इस्तीफा देना पड़ा।
तब काठमांडू के मेयर रहे बालेन शाह इस प्रदर्शन का चेहरा बन गए। बाद में हुए चुनावों में उनकी पार्टी ने बड़ी जीत हासिल की और बालेन प्रधानमंत्री बने।
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