० ….सरकार ने कहा— सुरक्षा, आत्मसमर्पण नीति और विकास कार्यों से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बदली तस्वीर
रायपुर, 14 जुलाईं (आरएनएस)। छत्तीसगढ़ विधानसभा में नक्सलवाद के खिलाफ केंद्र और राज्य सरकार के प्रयासों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा गया। प्रस्ताव में नक्सल हिंसा में शहीद हुए जवानों, पुलिसकर्मियों और निर्दोष नागरिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई तथा नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए किए गए कार्यों का उल्लेख किया गया।
प्रस्ताव में कहा गया कि नक्सलवाद की वजह से दशकों तक बस्तर सहित कई क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और रोजगार जैसी मूलभूत सुविधाएं प्रभावित रहीं। रानीबोदली, ताड़मेटला, झीरम घाटी और अन्य बड़े नक्सली हमलों का उल्लेख करते हुए शहीदों के सर्वोच्च बलिदान को याद किया गया।
सरकार ने दावा किया कि वर्ष 2024 से 2026 के बीच नक्सली घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है। इस अवधि में 537 नक्सली मारे गए, 2,055 गिरफ्तार हुए और 2,948 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। साथ ही नई आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत आर्थिक सहायता, आवास, प्रशिक्षण और रोजगार जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
प्रस्ताव में बस्तर पंडुम, बस्तर ओलंपिक, नियद नेल्लानार योजना और सेवा डेरा जैसी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा गया कि इन पहलों से आदिवासी क्षेत्रों में विकास, खेल, संस्कृति और सरकारी सेवाओं की पहुंच बढ़ी है। सड़क, रेल, मोबाइल टावर और अन्य बुनियादी ढांचे के विस्तार पर भी सरकार ने जोर दिया।
प्रस्ताव के अंत में सभी दलों से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के विकास में सहयोग की अपील की गई और नक्सल हिंसा के खिलाफ अपने प्राण न्योछावर करने वाले सभी वीर जवानों एवं नागरिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
त्रिपाठी
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