0 हत्या-लूट के आंकड़ों पर विधानसभा में सरकार का जवाब
रायपुर, 15 जुलाई (आरएनएस)। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में प्रदेश में अपराध की स्थिति को लेकर सरकार ने आंकड़े पेश किए। विधायक उमेश पटेल के सवाल के जवाब में उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने बताया कि पिछले दो वर्षों के दौरान अपहरण के मामलों में अधिकांश जिलों में वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं हत्या और लूट के मामलों में कई जिलों में कमी तो कुछ में बढ़ोतरी देखने को मिली है।
गृह मंत्री ने कहा कि हत्या, अपहरण सहित गंभीर अपराधों पर पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। समय-सीमा में चालान प्रस्तुत करने, अपराधियों पर निगरानी रखने तथा कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए महिला थाना, साइबर थाना, सामुदायिक पुलिसिंग, जन चौपाल और त्वरित कानूनी कार्रवाई जैसी व्यवस्थाओं को प्रभावी बनाया गया है। महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए हेलो सिस्टर अभियान और अभिव्यक्ति मोबाइल ऐप के माध्यम से जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं।
रायपुर में सबसे ज्यादा अपहरण के मामले
1 जुलाई 2024 से 30 जून 2025 तथा 1 जुलाई 2025 से 30 जून 2026 के बीच के आंकड़ों के अनुसार, राजधानी रायपुर में अपहरण के सबसे अधिक मामले दर्ज हुए। वर्ष 2024-25 में 524 मामलों की तुलना में 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 634 हो गई।
बिलासपुर में अपहरण के मामले 331 से बढ़कर 438 और दुर्ग में 229 से बढ़कर 365 हो गए, जिससे स्पष्ट है कि प्रदेश के प्रमुख शहरों में इस अपराध में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
हत्या के मामलों में मिला-जुला रुख
हत्या के मामलों में अलग-अलग जिलों में अलग-अलग स्थिति देखने को मिली। रायपुर में हत्या के मामले 85 से घटकर 84 हो गए, जबकि बिलासपुर में 59 से घटकर 50 दर्ज किए गए। दूसरी ओर दुर्ग में हत्या के मामलों में वृद्धि हुई और संख्या 53 से बढ़कर 60 पहुंच गई।
लूट के मामलों में रायपुर और दुर्ग में कमी
लूट की घटनाओं में रायपुर में मामूली कमी दर्ज की गई, जहां मामले 66 से घटकर 64 रह गए। बिलासपुर में लूट के मामले 31 से बढ़कर 34 हो गए, जबकि दुर्ग में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज करते हुए मामलों की संख्या 43 से घटकर 27 रह गई।
आदिवासी जिलों में अपेक्षाकृत कम अपराध
सरकार द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार नारायणपुर, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी और सुकमा जैसे आदिवासी बहुल जिलों में हत्या, लूट और अपहरण जैसे गंभीर अपराधों की दर्ज संख्या प्रदेश के बड़े शहरों की तुलना में काफी कम रही।
हिरासत में मौत के मामले बेहद कम
गृह मंत्री ने बताया कि हिरासत में मृत्यु के मामले लगभग सभी जिलों में शून्य रहे, जो सकारात्मक संकेत है। हालांकि कोरबा में वर्ष 2024-25 के दौरान एक मामला दर्ज हुआ था। वहीं सूरजपुर और बीजापुर में वर्ष 2025-26 के दौरान एक-एक मामला दर्ज किया गया। धमतरी में भी वर्ष 2024-25 में हिरासत में मौत का एक मामला सामने आया था।
गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि प्रदेश में अपराध नियंत्रण के लिए संवेदनशील क्षेत्रों में बीट व्यवस्था, सघन पेट्रोलिंग और सतत निगरानी को और मजबूत किया जा रहा है, ताकि कानून-व्यवस्था बेहतर बनी रहे और आम नागरिकों को सुरक्षित वातावरण मिल सके।
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