कोटद्वार,16 जुलाई (आरएनएस )। जीआईसी कोटद्वार का 86 वर्ष पुराना प्रथम ब्लॉक जर्जर हालत में पहुंच गया है। भवन के पांच कमरे निष्प्रयोज्य घोषित किए जा चुके हैं जबकि अन्य कक्ष भी खस्ताहाल है। बरसात के दौरान छत से पानी टपकने के कारण कमरों और बरामदों में जलभराव हो जाता है जिससे पढ़ाई प्रभावित हो रही है। मजबूरी में विद्यालय प्रशासन को कक्षा छह से नौ तक की कक्षाएं दूसरे ब्लॉक के बरामदों और सभागार में संचालित करनी पड़ रही हैं। भवन निर्माण के लिए मंडी समिति की ओर से तैयार की गई डीपीआर पिछले दो साल से शासन में धूल फांक रही है।
वर्ष 1940 में निर्मित इस भवन में पहले केवल जूनियर कक्षाएं संचालित होती थीं। वर्तमान में जूनियर कक्षाओं को थर्ड ब्लॉक में शिफ्ट कर दिया गया है। यहां कक्षा नौ की पढ़ाई के अलावा स्काउट कक्ष, दो स्टाफ रूम, पुस्तकालय और व्यावसायिक शिक्षा प्रयोगशाला भी संचालित होती हैं। भवन की खराब स्थिति के चलते विद्यार्थियों और शिक्षकों को लगातार दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
दुगड्डा ब्लॉक का प्रमुख शिक्षण संस्थान होने के कारण जीआईसी कोटद्वार बोर्ड परीक्षाओं, उत्तर पुस्तिका मूल्यांकन, बैक पेपर संकलन और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं का महत्वपूर्ण केंद्र भी है। उत्तराखंड लोक सेवा आयोग, अधीनस्थ सेवा चयन आयोग समेत विभिन्न विभागों की परीक्षाएं और शिक्षा विभाग की ब्लॉक, जिला एवं राज्य स्तरीय गतिविधियां भी यहीं आयोजित होती हैं।
विद्यालय प्रबंधन ने कई बार उच्चाधिकारियों को भवन की स्थिति से अवगत कराया लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका है। दो वर्ष पूर्व कार्यदायी संस्था मंडी समिति ने पांच नए कमरे, पुस्तकालय, गल्र्स कॉमन रूम, दो प्रयोगशालाएं, छात्र-छात्राओं के लिए शौचालय, सभागार और चारदीवारी के निर्माण के लिए 265.95 लाख रुपये की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर शासन को भेजी थी लेकिन अभी तक बजट स्वीकृत नहीं हो सका है।
प्रभारी प्रधानाचार्य मुकेश रावत ने बताया कि दो साल पहले पांच कमरे, लाइब्रेरी, गल्र्स कॉमन रूम व दो प्रयोगशाला के निर्माण के लिए कार्यदायी संस्था मंडी समिति ने इसके लिए डीपीआर तैयार कर शासन को भेज दी थी लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। उच्चाधिकारियों को लगातार मामले से अवगत कराया जा रहा है।
दो साल पहले 265.95 लाख की डीपीआर तकनीकी स्वीकृति के बाद बजट अनुमोदन के लिए शासन को भेजी जा चुकी है। बजट स्वीकृत होते ही निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा। – विपुल पोखरियाल, जेई मंडी समिति।
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