रायपुर, 17 जुलाई (आरएनएस)। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सामने आए चर्चित E-20 ईंधन विवाद में ऑटोमोबाइल कंपनी मारुति सुजुकी ने बड़ा फैसला लिया है। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग द्वारा ग्राहक के पक्ष में दिए गए आदेश के खिलाफ कंपनी अब उच्च मंच पर अपील करेगी।
कंपनी ने एक बयान जारी कर कहा कि उसे रायपुर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के उस आदेश की जानकारी मिली है, जिसमें ग्राहक की कार को नए E-20 अनुकूल मॉडल से बदलने या पूरी खरीद राशि लौटाने का निर्देश दिया गया है। कंपनी का दावा है कि संबंधित वाहन पहले से ही E-20 ईंधन के अनुकूल था और ग्राहक के वाहन से लिए गए ईंधन में मिलावट के स्पष्ट प्रमाण मिले हैं। साथ ही, कई महत्वपूर्ण तथ्यों पर आयोग ने विचार नहीं किया। इसलिए कंपनी कानून के तहत उचित उच्च मंच पर इस आदेश को चुनौती देगी।
क्या है पूरा मामला
सड्डू (रायपुर) निवासी डॉ. प्रेमराज देवता ने 3 जून 2024 को मारुति ग्रैंड विटारा खरीदी थी। कुछ महीनों बाद 11 नवंबर 2024 को कार में तकनीकी खराबी आ गई। अधिकृत सर्विस सेंटर में जांच के दौरान उन्हें बताया गया कि समस्या मिलावटी पेट्रोल के कारण हुई है।
डॉ. देवता का आरोप है कि कई बार रिपेयरिंग और पेट्रोल टैंक की सफाई के बावजूद कार में बार-बार वही खराबी आती रही। डीलर और निर्माता कंपनी ने वाहन में किसी भी निर्माणगत दोष से इनकार कर दिया।
इसके बाद उन्होंने पेट्रोल का नमूना मान्यता प्राप्त एसजीएस लैब में जांच के लिए भेजा। रिपोर्ट में बताया गया कि पेट्रोल गुणवत्ताहीन नहीं था, बल्कि इंजन के अनुकूल नहीं होने के कारण इंजन बार-बार चोक हो रहा था। वहीं संबंधित पेट्रोल पंप का कहना था कि अन्य किसी ग्राहक ने ऐसी शिकायत नहीं की थी।
जब कंपनी ने कार की री-सेल वैल्यू करीब 12 लाख रुपये आंकी, तो डॉ. देवता ने जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में शिकायत दर्ज कराई।
आयोग का फैसला
सुनवाई के बाद आयोग ने माना कि इस मामले में उपभोक्ता की कोई गलती नहीं थी और वाहन का इंजन देश में उपलब्ध श्व-20 पेट्रोल के अनुरूप कार्य नहीं कर रहा था। आयोग ने कहा कि उपभोक्ता को उपयुक्त उत्पाद उपलब्ध कराना निर्माता और डीलर की जिम्मेदारी है।
आयोग ने मारुति सुजुकी और डीलर को 45 दिनों के भीतर ग्राहक को उसी मॉडल की नई श्व-20 सपोर्टेड कार उपलब्ध कराने अथवा 20,50,494 की पूरी खरीद राशि लौटाने का निर्देश दिया। इसके अलावा मानसिक प्रताडऩा के लिए 1 लाख तथा वाद व्यय के रूप में 10,000 देने का आदेश भी दिया। निर्धारित समय सीमा में भुगतान नहीं करने पर 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देय होगा।
अब इस मामले में मारुति सुजुकी ने आयोग के आदेश को उच्च मंच पर चुनौती देने की तैयारी शुरू कर दी है। मामला श्व-20 ईंधन और वाहन अनुकूलता को लेकर उपभोक्ता अधिकारों से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में शामिल हो गया है।
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