टोक्यो,17 जुलाई। जापान के पूर्व न्याय मंत्री हिदेकी माकिहारा ने अहमदाबाद से मुंबई के बीच जल्द दौडऩे वाली भारत की पहली बुलेट ट्रेन को लेकर चौंकाने वाला दावा किया है। उन्होंने परियोजना में देरी होने के पीछे भारत सरकार का अजीब रवैया बताया है और कहा कि भारत अपने वादे पूरे नहीं करता और समझौते के बाद भी पीछे हट जाते हैं। परियोजना से जुड़े रहे माकिहारा ने भारत सरकार पर बुलेट ट्रेन में सुरक्षा से समझौता करने का भी आरोप लगाया।
माकिहारा ने एक रिपोर्ट एक्स पर साझा कर लिखा, मैं भारत में शिंकानसेन प्रोजेक्ट से व्यक्तिगत रूप से जुड़ा था और सबसे हैरान करने वाली बात अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस और बातचीत के दौरान भारतीय पक्ष का अजीब व्यवहार था। वे अपने वादे पूरे नहीं करते थे, समझौता होने के बाद भी, पीछे हट जाते थे। वे आखिर तक अपने निजी फायदे के लिए अड़े रहे। संबंधित मंत्री का व्यवहार बहुत ही खराब था।
माकिहारा ने आगे लिखा, जब सबसे ऊंचे पद पर बैठा व्यक्ति ऐसा व्यवहार करे, तो सही डील करना नामुमकिन होता है। इस प्रोजेक्ट पर कड़ी मेहनत करने वाले सभी जापानी कर्मचारियों की साख को देखते हुए, मुझे यह कहना होगा कि इस प्रोजेक्ट के आगे न बढ़ पाने के लिए 100 प्रतिशत भारतीय पक्ष जिम्मेदार है।उन्होंने भारतीय शिंकानसेन प्रोजेक्ट को विफल बताते हुए लिखा कि जापान को सुरक्षा के लिए बहुत अहम सिग्नलिंग सिस्टम से बाहर रखा गया है।
दिल्ली में रहने वाले मेट्रो वाहन सलाहकर जापानी रेलवे इंजीनियर इसाओ त्सुजिमुरा ने लेख में भारत-जापान शिंकानसेन प्रोजेक्ट यानी मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना से लेकर कुछ खुलासे किए हैं।
उन्होंने बताया कि भारत की बुलेट ट्रेन परियोजना मूल जापानी शिंकानसेन ब्लूप्रिंट से भटक गई है।
उन्होंने सिग्नलिंग प्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत में परियोजना की प्रगति आसान नहीं लग रही है।
परियोजना 2017 में शुरू हुई थी, जिसे 2023 तक पूरा होना था।
इसाओ ने सबसे बड़ी चिंता परियोजना के लिए जापान की डीएस-एटीसी प्रणाली से हटकर यूरोपीय सिग्नलिंग प्रणाली ईटीसीएस-एल2 के उपयोग पर जताई है।
इसाओ का कहना है कि सिग्नलिंग हाई-स्पीड ट्रेन की सुरक्षा की नींव है और जापान ने पिछले 60 साल में रेल संचालन में विफलता से एक भी यात्री की मौत नहीं देखी है।
उन्होंने बताया कि जनवरी 2025 में जापानी प्रौद्योगिकी को खारिज कर दिया गया और जापानी प्रधानमंत्री के दौरे से भी इसमें प्रगति नहीं हुई।
००
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

