० ग्राम सभाओं में नहीं मिली गणपूर्ति, जिला योजना समितियां भी रहीं निष्क्रिय; स्थानीय निकायों के वित्तीय एवं प्रशासनिक प्रबंधन में गंभीर कमियां उजागर
रायपुर, 17 जुलाईं (आरएनएस)। छत्तीसगढ़ की पंचायती राज संस्थाओं में स्वीकृत पदों के मुकाबले 61 प्रतिशत पद रिक्त हैं, राज्य वित्त आयोग की अनुशंसित राशि की तुलना में स्थानीय निकायों को ?3,243.46 करोड़ कम राशि हस्तांतरित की गई तथा अधिकांश ग्राम सभाओं की बैठकों में आवश्यक गणपूर्ति नहीं मिली। भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) की लेखापरीक्षा में स्थानीय निकायों के वित्तीय प्रबंधन, प्रशासनिक क्षमता और विकेंद्रीकृत शासन व्यवस्था से जुड़ी अनेक गंभीर कमियां सामने आई हैं।
भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) की ओर से तैयार मार्च 2023 को समाप्त वर्ष के लिए छत्तीसगढ़ सरकार पर स्थानीय निकायों संबंधी लेखापरीक्षा प्रतिवेदन हाल ही में छत्तीसगढ़ विधानसभा में प्रस्तुत किया गया। रिपोर्ट में पंचायती राज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों की वित्तीय व्यवस्था, योजनाओं के क्रियान्वयन, लेखा प्रणाली, राजस्व प्रबंधन तथा संस्थागत क्षमता का परीक्षण किया गया है, जिसमें अनेक महत्वपूर्ण अनियमितताओं और प्रणालीगत कमियों की ओर ध्यान आकर्षित किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार संविधान की 11वीं अनुसूची के सभी 29 विषय पंचायती राज संस्थाओं को हस्तांतरित किए जाने के बावजूद उनके प्रभावी संचालन के लिए आवश्यक कार्यात्मक व्यवस्था विकसित नहीं की गई। इसके अलावा वर्ष 2018 से 2023 के दौरान जिला योजना समितियों की बैठकें आयोजित नहीं होने से स्थानीय स्तर पर विकास योजनाओं के समन्वित नियोजन का उद्देश्य भी प्रभावित हुआ।
लेखापरीक्षा में यह भी पाया गया कि राज्य सरकार ने पंचायती राज संस्थाओं को भू-राजस्व, भू-राजस्व उपकर तथा उत्पाद शुल्क अधिभार जैसे निर्धारित राजस्व स्रोतों से कोई राशि उपलब्ध नहीं कराई। वर्ष 2018-23 के दौरान राज्य वित्त आयोग की अनुशंसा की तुलना में स्थानीय निकायों को ?3,243.46 करोड़ कम राशि हस्तांतरित की गई, जबकि लघु खनिज रॉयल्टी तथा स्टाम्प एवं पंजीयन शुल्क मद से केवल ?398.20 करोड़ का ही हस्तांतरण हुआ।
रिपोर्ट में ग्राम सभाओं की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। नमूना जांच में शामिल 36 ग्राम पंचायतों में किसी भी ग्राम सभा की बैठक में आवश्यक गणपूर्ति नहीं मिली। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की गई। कई पंचायतों में निर्धारित प्रारूप में वार्षिक लेखे भी तैयार नहीं किए गए।
मानव संसाधन की स्थिति भी चिंताजनक पाई गई। संचालनालय, जिला एवं जनपद पंचायतों में स्वीकृत 2,260 पदों में से केवल 872 पद ही भरे गए थे, जबकि 1,388 पद रिक्त थे। इसके अतिरिक्त ग्राम पंचायत स्तर पर 1,278 सचिवों की कमी दर्ज की गई, जिससे योजनाओं के क्रियान्वयन और प्रशासनिक कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पडऩे की आशंका जताई गई है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ई-ग्राम स्वराज पोर्टल लागू होने के बाद भी पंचायती राज संस्थाओं में अधिकांश वित्तीय लेन-देन का लेखांकन अब भी मैनुअल नकद प्रणाली से किया जा रहा है। केवल केंद्रीय वित्त आयोग से प्राप्त अनुदानों का लेखांकन ही ऑनलाइन किया जा रहा है। वहीं शहरी स्थानीय निकायों में भी द्वि-प्रविष्टि आधारित आधुनिक लेखा प्रणाली पूरी तरह लागू नहीं हो सकी है।
शहरी स्थानीय निकायों के संबंध में लेखापरीक्षा में राजस्व हानि और परियोजनाओं के कमजोर प्रबंधन की भी ओर संकेत किया गया है। नगर निगम राजनांदगांव में सुभाष द्वार बिजनेस कॉम्प्लेक्स की दुकानों के आवंटन में विलंब से संभावित किराया राजस्व की हानि हुई, जबकि जांजगीर-नैला और अकलतरा की जल प्रदाय परियोजनाओं में विलंब के बावजूद ठेकेदारों से ?5.18 करोड़ की निर्धारित क्षतिपूर्ति राशि की वसूली नहीं की गई।
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