रायपुर, 17 जुलाई (आरएनएस)। छत्तीसगढ़ की आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) ने करीब 30 साल पुराने गृह निर्माण ऋण घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों के खिलाफ विशेष न्यायालय में 15 हजार पन्नों का चालान पेश किया है। यह मामला वर्ष 1995 से 1998 के बीच सरकारी आवासीय योजना के तहत स्वीकृत 1 करोड़ 86 लाख रुपये के गृह निर्माण ऋण में कथित गबन से जुड़ा है।
ईओडब्ल्यू की जांच में खुलासा हुआ कि आधुनिक गृह निर्माण सहकारी समिति मर्यादित रायपुर के तत्कालीन अध्यक्ष थावरदास माधवानी, सहकारी आवास संघ रायपुर के तत्कालीन आवास पर्यवेक्षक बसंत कुमार साहू और सहकारी आवास संघ भोपाल के तत्कालीन प्रबंधक प्रदीप कुमार निखरा ने कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों, झूठे उपयोगिता प्रमाण-पत्र और भवन निर्माण पूर्णता प्रमाण-पत्रों के आधार पर सरकारी ऋण राशि का गबन किया।
जांच के अनुसार, समिति के 186 सदस्यों के नाम पर एक-एक लाख रुपये की दर से कुल 1.86 करोड़ रुपये का गृह निर्माण ऋण स्वीकृत कराया गया था। दस्तावेजों में रायपुरा और पंडरी कांपा क्षेत्र में मकान निर्माण का दावा किया गया, लेकिन भौतिक सत्यापन के दौरान वहां कोई मकान नहीं मिला। कई लाभार्थी अपने बताए गए पते पर भी नहीं मिले, जिससे फर्जीवाड़े की पुष्टि हुई।
ईओडब्ल्यू ने बताया कि आरोपियों ने आपसी मिलीभगत से सरकारी धन का दुरुपयोग किया। बिना वास्तविक निर्माण के फर्जी प्रमाण-पत्रों के आधार पर ऋण की पूरी प्रक्रिया पूरी कराई गई।
104 करोड़ रुपये तक पहुंचा बकाया
रिकॉर्ड के अनुसार, 31 दिसंबर 2025 तक मूल ऋण राशि और उस पर ब्याज मिलाकर बकाया राशि करीब 104 करोड़ रुपये हो चुकी है, जो राज्य सहकारी आवास संघ के खाते में डूबत ऋण के रूप में दर्ज है।
ईओडब्ल्यू का कहना है कि लंबे समय से लंबित इस मामले में विस्तृत जांच के बाद पर्याप्त साक्ष्य जुटाकर चालान न्यायालय में पेश किया गया है। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि सरकारी धन से जुड़े आर्थिक अपराधों में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। अब मामले में विशेष न्यायालय में सुनवाई के दौरान आरोपियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
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