० पेंशनर्स महासंघ ने किया फैसले का स्वागत
रायपुर, 18 जुलाई (आरएनएस)। छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश राज्य के पेंशनरों को देय महंगाई राहत (डीआर) में वृद्धि के संबंध में दोनों राज्यों के बीच प्रचलित पारस्परिक सहमति की अनिवार्यता को समाप्त करने का निर्णय हो गया है । वर्ष 2000 में मध्यप्रदेश के पुनर्गठन और छत्तीसगढ़ राज्य बनने के लगभग 26 वर्ष तक सहमति की यह बाध्यता जारी थी। दोनों राज्यों के लाखों पेंशनरों को विगत लगभग 26 वर्षों से इस फैसले का इंतज़ार था ।
भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ, छत्तीसगढ़ प्रदेश ने इसका स्वागत किया है। महासंघ के छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव ने आज यहाँ इस आशय की जानकारी दी । उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश शासन के वित्त विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार भविष्य में पेंशनरों को महँगाई राहत घोषित करने के लिए दूसरे राज्य की सहमति प्राप्त करना आवश्यक नहीं होगा । मध्यप्रदेश के वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव मनीष रस्तोगी और छत्तीसगढ़ शासन के वित्त सचिव डॉ. रोहित यादव के संयुक्त हस्ताक्षर से मध्यप्रदेश के वित्त विभाग ने 17 जुलाई को वल्लभ भवन (मंत्रालय )भोपाल से यह आदेश किया है ।अब दोनों राज्य अपने-अपने स्तर पर सक्षम कार्यकारी आदेश जारी कर सकेंगे। इससे पेंशनरों को महंगाई राहत स्वीकृत करने की प्रक्रिया सरल एवं त्वरित होने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ, छत्तीसगढ़ प्रदेश के प्रांताध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव ने कहा कि यह निर्णय पेंशनरों के हित में एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक कदम है। उन्होंने कहा कि भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ द्वारा निरंतर ज्ञापन, पत्राचार तथा वित्त सचिव एवं मुख्य सचिव, छत्तीसगढ़ शासन के साथ कई बार की गई चर्चाओं के माध्यम से इस विषय को लगातार उठाया जाता रहा है। यह निर्णय उसी सतत प्रयास का सुखद परिणाम है।
श्री नामदेव ने छत्तीसगढ़ शासन से मांग की है कि अब जब महंगाई राहत स्वीकृत करने में पारस्परिक सहमति की बाध्यता समाप्त हो गई है, तब राज्य शासन बिना किसी विलंब के केंद्र सरकार के समान एक जनवरी 2026 से देय 2 प्रतिशत महंगाई राहत (डीआर) का आदेश जारी करे तथा इसका भुगतान एरियर सहित राज्य के सभी पेंशनरों एवं परिवार पेंशनरों को प्रदान किया जाए।
श्री नामदेव ने कहा कि लगातार बढ़ती महँगाई के बीच पेंशनरों को समय पर महँगाई राहत मिलना उनका वैधानिक अधिकार है। शासन द्वारा शीघ्र निर्णय लिए जाने से लाखों पेंशनरों एवं परिवार पेंशनरों को आर्थिक राहत मिलेगी ।
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