0-आंध्र प्रदेश में चार संक्रमित मरीजों की मौत, सभी पहले से गंभीर बीमारियों से थे पीडि़त; विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा- बीमारी अब स्थानीय स्तर पर बनी रहने वाली संक्रमण की श्रेणी में
नई दिल्ली,18 जुलाई(आरएनएस)। कोरोना वायरस (कोविड-19) महामारी ने वर्ष 2020 में पूरी दुनिया को गहरे संकट में डाल दिया था। 11 मार्च 2020 को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे वैश्विक महामारी घोषित किया था। इसके बाद दुनिया के अधिकांश देशों में लॉकडाउन, यात्रा प्रतिबंध, विद्यालय बंद करने सहित कई कड़े कदम उठाए गए। महामारी ने वैश्विक अर्थव्यवस्था और आम जनजीवन को गंभीर रूप से प्रभावित किया तथा आधुनिक इतिहास की सबसे बड़ी आर्थिक मंदी का कारण बनी। बाद में व्यापक टीकाकरण अभियान चलाए गए और मई 2023 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोविड-19 को वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल की श्रेणी से हटा दिया। वर्तमान में यह बीमारी स्थानीय स्तर पर बनी रहने वाली संक्रमण (एंडेमिक) की स्थिति में पहुंच चुकी है।
हालांकि, देश के कुछ राज्यों में कोविड-19 के मामलों में स्थानीय स्तर पर बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। नए स्वरूपों (वेरिएंट) के सामने आने और विभिन्न क्षेत्रों से संक्रमण की पुष्टि होने के कारण लोगों में चिंता बढ़ी है। विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल भारत में संक्रमण की कोई बड़ी राष्ट्रीय लहर नहीं है, लेकिन आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र के मुंबई तथा उत्तर प्रदेश के वाराणसी सहित कुछ क्षेत्रों में नए मामले सामने आए हैं।
आंध्र प्रदेश में कोविड-19 से संक्रमित चार मरीजों की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। चिकित्सकों ने स्पष्ट किया है कि जिन मरीजों की मृत्यु हुई, वे पहले से ही अनियंत्रित मधुमेह, गुर्दे की गंभीर बीमारी अथवा यकृत संबंधी गंभीर रोग जैसी सह-रुग्णताओं से पीडि़त थे। विशेषज्ञों के अनुसार सामान्य एवं स्वस्थ लोगों में यह संक्रमण अधिकांश मामलों में हल्का ही रहता है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार 26 जून से 16 जुलाई के बीच राज्य में कोरोना संक्रमण के 12 मामले सामने आए, जिनमें चार मरीजों की मौत हुई। इस अवधि में जांचे गए 67 नमूनों में से 11 की पुष्टि संक्रमित के रूप में हुई।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार 1 जुलाई से अब तक देशभर में कोविड-19 के 339 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें सर्वाधिक 115 मामले केरल में पाए गए हैं। इसके बाद कर्नाटक में 64, महाराष्ट्र में 43, तमिलनाडु में 39, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में 18, दिल्ली में 18 तथा राजस्थान में 12 मामले सामने आए हैं। अन्य राज्यों में भी छिटपुट संक्रमण दर्ज किया गया है।
अधिकारियों के अनुसार आंध्र प्रदेश में मिले संक्रमित मरीज अलग-अलग मंडलों के निवासी हैं और वे किसी एक संक्रमण समूह का हिस्सा नहीं हैं। वायरस के नए स्वरूप की पहचान के लिए संक्रमितों के नमूने पुणे स्थित राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान भेजे गए हैं। साथ ही सभी अस्पतालों, चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन तथा विभिन्न देशों की स्वास्थ्य एजेंसियां इस समय ओमिक्रॉन के कुछ उप-स्वरूपों पर विशेष निगरानी रखे हुए हैं। इन्हें निगरानी के अधीन स्वरूप की श्रेणी में रखा गया है।
हाल के महीनों में ओमिक्रॉन परिवार का सिकाडा (बीए.3.2) नामक स्वरूप अमेरिका और यूरोप सहित लगभग 23 देशों में फैल चुका है। इसके स्पाइक प्रोटीन में कई आनुवंशिक परिवर्तन पाए गए हैं, जिनके कारण यह तेजी से फैल सकता है तथा शरीर की पहले से मौजूद रोग प्रतिरोधक क्षमता को आंशिक रूप से प्रभावित कर सकता है। हालांकि अब तक यह पहले के स्वरूपों की तुलना में अधिक घातक सिद्ध नहीं हुआ है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार निंबस (एनबी.1.8.1) ओमिक्रॉन का तेजी से फैलने वाला एक अन्य उप-स्वरूप है। वहीं स्ट्रैटस (एक्सएफजी) के साथ मिलकर यह विश्व के कई देशों में संक्रमण बढऩे का प्रमुख कारण माना जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ये स्वरूप तेजी से फैलते अवश्य हैं, लेकिन अधिकांश संक्रमितों में बीमारी की गंभीरता हल्की ही देखी जा रही है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान स्थिति में घबराने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि सावधानी बरतना अधिक जरूरी है। बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, गंभीर बीमारियों से पीडि़त लोगों तथा कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले व्यक्तियों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। यदि बुखार, खांसी, गले में खराश या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए। साथ ही भीड़भाड़ वाले स्थानों पर स्वच्छता बनाए रखना, हाथों की नियमित सफाई करना तथा आवश्यकता पडऩे पर मास्क का उपयोग करना संक्रमण से बचाव के प्रभावी उपाय माने जा रहे हैं।
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