वाशिंगटन/तेहरान,19 जुलाई। मिडिल ईस्ट में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. अमेरिका ईरान पर ताबड़तोड़ हमले कर रहा है तो वहीं ईरान में खाड़ी के देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है. इस बीच शुक्रवार को ईरान ने जॉर्डन में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर हमला किया. जिसमें दो अमेरिकी सैनिक मारे गए. इन हमलों के बाद अमेरिका ने भी ईरान के खिलाफ हमले तेज कर दिए और शनिवार को लगातार आठवीं रात ईरान पर ताबड़तोड़ मिसाइल हमले किए.
शनिवार को जॉर्डन में मारे गए 2 और अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद ये आंकड़ा बढ़कर 16 हो गया है. जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले के के कुछ घंटे बाद ही अमेरिका ने ईरान में तबाही मचा दी. भारतीय समयानुसार अमेरिका ने रविवार तड़के करीब 4.30 बजे ईरान पर नए हवाई हमले शुरू कर दिए. ये हमले राष्ट्रपति ट्रंप के निर्देश के बाद शुरू किए गए.
बता दें कि ईरान ने 17 जुलाई यानी शुक्रवार को ईरान ने जॉर्डन में स्थित अमेरिका सैन्य ठिकानों पर हमला किया था. जिसमें दो अमेरिकी सैनिक मारे गए थे. यूएस सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट कर इस हमले की जानकारी दी. सेंटकॉम ने एक्स पर लिखा, 17 जुलाई को जॉर्डन में यूएस सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) और सहयोगी सेनाओं ने ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमलों का मुकाबला किया. इस दौरान अमेरिकी सेना के दो जवान मारे गए. साथ ही, एक जवान अभी भी लापता है.
अमेरिकी सेंट्रल कमांड का कहना है कि ईरान पर किए गए इन हमलों का मकसद ईरान की उस सैन्य क्षमता को कमजोर करना है, जिससे वह होर्मुज जलडमरूमध्य में अंतरराष्ट्रीय जहाजों को खतरा पहुंचा सकता है. इसके साथ ही अमेरिका ने कहा है कि ये कार्रवाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की उन गतिविधियों के जवाब में की गई है, जिनमें जॉर्डन में तैनात अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाया गया.
बता दें कि अमेरिका और ईरान के बीच 28 फरवरी को जंग की शुरुआत हुई थी. करीब 40 दिनों तक चली जंग के बाद अप्रैल के दूसरे सप्ताह में दोनों देशों ने सीजफायर का एलान किया. उसके बाद शांति समझौते की कोशिश शुरू हुई. पाकिस्तान ने इस शांति समझौते की पहल शुरू की. इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता बेनतीजा रही. उसके बाद दोनों देशों के बीच वर्चुअली भी बातचीत हुई. जून में समझौता ज्ञापन पर दोनों देशों ने हस्ताक्षर कर दिए. लेकिन ये समझौता ज्यादा दिनों तक नहीं चला और जुलाई में फिर से दोनों देशों जंग के मैदान में कूद पड़े.
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