हावड़ा फूड पार्क में दुनिया के सबसे बड़े दही उत्पादन संयंत्र की रखी गई आधारशिला
हावड़ा। पश्चिम बंगाल के औद्योगिक परिदृश्य में आज एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया। हावड़ा जिले के सांकराइल में गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन महासंघ की प्रसिद्ध डेयरी ब्रांड ‘अमूलÓ के विश्व स्तरीय दही विनिर्माण संयंत्र की आधारशिला रखी। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने इस मेगा प्रोजेक्ट के भूमि पूजन समारोह का शिलान्यास किया। लगभग 700 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से बनने वाला यह प्लांट न केवल भारत, बल्कि दुनिया का सबसे बड़ा दही विनिर्माण संयंत्र होगा। इस भव्य शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पुराने बयानों पर तीखा राजनीतिक पलटवार किया।मुख्यमंत्री ने उद्योगपतियों को आश्वस्त किया कि वर्तमान सरकार बंगाल को आर्थिक आपदा से बाहर निकालने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। अब उद्योग लगाने के लिए किसी भी निवेशक को प्रशासनिक अड़चनों का सामना नहीं करना पड़ेगा, बल्कि सरकार खुद आगे बढ़कर लाल फीताशाही को खत्म कर रही है। जो लोग जो कहते थे गुजरात नहीं बनने दूंगा वह आज बंगाल के विकास के बारे में समाचारों में देखें। सीएम ने आगे कहा कि, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी लीडरशिप में बनाए गए कोऑपरेशन और फिशरीज के अलग-अलग विभागों का फ़ायदा देश के लोगों को मिल रहा है। गुजरात के सफल अनुभव से यह साबित हो चुका है कि कोऑपरेटिव मूवमेंट एक वैकल्पिक ग्रामीण अर्थव्यवस्था की कुंजी बन सकता है।” अमूल की सफलता की कहानी का जि़क्र करते हुए उन्होंने बताया कि यह संस्था सिर्फ 11 प्राइमरी कोऑपरेटिव और रोजाना 5,000 किलो दूध इक_ा करने के साथ शुरू हुई थी; आज यह राज्य भर में 880 डेयरी कोऑपरेटिव सोसायटियों के ज़रिए रोज़ाना 9.5 लाख किलो दूध इक_ा करती है। कुल 1,25,000 किसान—जिनमें 30,000 महिलाएं शामिल हैं—इस पहल से सीधे या परोक्ष रूप से जुड़े हुए हैं। धूलागढ़ में इस नए प्लांट के उद्घाटन से न सिर्फ राज्य में ‘श्वेत क्रांतिÓ को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि बंगाल की पारंपरिक ‘मिष्टी दोईÓ (मीठी दही) के कमर्शियल विस्तार को आसान बनाकर ‘स्वीट रिवोल्यूशनÓ की भी शुरुआत होगी।
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