बिलासपुर, 21 जुलाई (आरएनएस)अस्पताल पहुंचने की जल्दबाजी, बीच सड़क वाहन रोककर कथित वसूली, गर्भवती की तबीयत बिगड़ने का दावा और नामजद एफआईआर के बावजूद आरोपी अब भी गिरफ्त से बाहर—यही सवाल अब पुलिस की कार्रवाई पर भी उठने लगे हैं। बिलासपुर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र का यह मामला राज्य महिला आयोग तक पहुंच चुका है, जहां पीड़िता ने फाइनेंस कंपनी के कर्मचारियों पर धमकी, अभद्रता और जबरन वाहन ले जाने की कोशिश का आरोप लगाते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है।
पीड़िता प्रिया ठाकुर के अनुसार 11 जुलाई की दोपहर वह अपने पति अंकित सिंह ठाकुर और मां के साथ इलाज के लिए अस्पताल जा रही थीं। नेहरू चौक स्थित मल्टीलेवल पार्किंग के सामने कथित तौर पर सोहेल अख्तर, सिद्धार्थ अग्रवाल और निशांत गुप्ता ने वाहन रुकवाकर लंबित किस्त जमा करने का दबाव बनाया। महिला का कहना है कि गर्भवती होने की जानकारी देने और एक घंटे की मोहलत मांगने के बावजूद कथित तौर पर दबाव जारी रहा। आवेदन में दावा किया गया है कि 24 हजार रुपये जमा करने के बाद भी 15 हजार रुपये अतिरिक्त “खर्चा” मांगा गया तथा क्रेन से वाहन खींचने और साथ ले जाने की धमकी दी गई। घटना के दौरान डायल-112 बुलाने, धक्का लगने के बाद पेट दर्द बढ़ने और इलाज प्रभावित होने का भी उल्लेख शिकायत में किया गया है।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार 13 जुलाई को सिविल लाइन थाने में अपराध क्रमांक 962/2026 दर्ज कर भारतीय न्याय संहिता की धारा 296, 126, 351(3) और 3(5)के तहत विवेचना शुरू की गई। एफआईआर में सिद्धार्थ अग्रवाल, निशांत गुप्ता और सोहेल अख्तर को नामजद किया गया है। इसके बावजूद एफआईआर दर्ज होने के कई दिन बाद भी तीनों आरोपी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। उपलब्ध रिकॉर्ड में अब तक किसी गिरफ्तारी, बरामदगी या चार्जशीट का उल्लेख नहीं है। इसी बीच पीड़िता ने राज्य महिला आयोग का दरवाजा खटखटाते हुए जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
फिलहाल, मामला पुलिस जांच और राज्य महिला आयोग के समक्ष विचाराधीन है। आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही होगी, लेकिन नामजद एफआईआर दर्ज होने के बावजूद आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होना पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। आखिर जब आरोपी चिन्हित हैं और मामला दर्ज है, तो कानून का शिकंजा अब तक उन तक क्यों नहीं पहुंच सका? अब पीड़िता सहित आम लोगों की नजर पुलिस की अगली कार्रवाई और महिला आयोग के रुख पर टिकी हुई है।


