नई दिल्ली ,09 नवंबर(आरएनएस)। कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद शशि थरूर एक बार फिर अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में हैं। इस बार उन्होंने पूर्व उपप्रधानमंत्री और बीजेपी के दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी की राजनीतिक विरासत का समर्थन करते हुए उनकी तुलना जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी से कर दी है, जिसके बाद सोशल मीडिया पर एक नई बहस छिड़ गई है।
शशि थरूर ने 8 नवंबर को लालकृष्ण आडवाणी के 98वें जन्मदिन पर उन्हें शुभकामनाएं देते हुए ‘सच्चा राजनेताÓ बताया था। उन्होंने कहा, लोक सेवा के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता, उनकी विनम्रता और शालीनता और आधुनिक भारत की दिशा तय करने में उनकी भूमिका अविस्मरणीय है।
इसके बाद थरूर ने सोशल मीडिया पर तर्क दिया कि दशकों की सार्वजनिक सेवा करने वाले नेता का मूल्यांकन किसी एक प्रसंग के आधार पर नहीं होना चाहिए। उन्होंने लिखा, आडवाणी जी की लंबे वर्षों की सेवा को केवल एक घटना तक सीमित करना, चाहे वह कितनी ही महत्त्वपूर्ण क्यों न हो, अनुचित है। जैसे नेहरूजी के पूरे राजनीतिक जीवन को सिर्फ चीन के खिलाफ (1962) हुए झटके से नहीं आंका जा सकता, न ही इंदिरा गांधी को केवल इमरजेंसी से परिभाषित किया जा सकता है। उसी तरह की निष्पक्षता आडवाणी जी के साथ भी बरती जानी चाहिए।
हालांकि, आडवाणी के लंबे सार्वजनिक जीवन की थरूर द्वारा की गई इस प्रशंसा पर ऑनलाइन तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कई आलोचकों ने कांग्रेस सांसद पर बीजेपी नेता की कथित ‘विभाजनकारी राजनीतिÓ में निभाई गई भूमिका को सफेदपोश करने का आरोप लगाया। सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता संजय हेगड़े ने थरूर के पोस्ट पर पलटवार करते हुए कहा, इस देश में नफरत के बीज बोना किसी भी तरह से लोक सेवा नहीं है।
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