दतिया 10 नवंबर (आरएनएस)। कलेक्टर स्वप्निल वानखडे की अध्यक्षता में प्रत्येक सोमवार की तरह आज समय-सीमा बैठक संपन्न हुई। बैठक में सीएम हेल्पलाइन के लंबित प्रकरणों की विभागवार समीक्षा की गई। कलेक्टर ने 300 दिवस से अधिक समय से लंबित प्रकरणों पर गंभीर नाराजगी व्यक्त करते हुए निर्देश दिए कि सभी विभाग आगामी शुक्रवार तक इनका निराकरण सुनिश्चित करें। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जिन अधिकारियों की प्रगति असंतोषजनक पाई जाएगी, उनके विरुद्ध कार्यवाही की जाएगी।
कलेक्टर वानखडे ने विशेष रूप से शिक्षा विभाग की लंबित पेंशन प्रकरणों पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि पेंशन प्रकरणों में देरी अस्वीकार्य है। किसी भी कर्मचारी की सेवानिवृत्ति के तीन माह पूर्व उसकी संपूर्ण जानकारी कोषालय कार्यालय को उपलब्ध कराई जाए ताकि पेंशन संबंधी कार्यवाही समय-सीमा में पूरी की जा सके। उन्होंने चेतावनी दी कि इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
हाल ही में इंदरगढ़ क्षेत्र में स्कूल निरीक्षण के दौरान विद्यार्थियों की अनुपस्थिति पर कलेक्टर ने कड़ी नाराजगी जताई थी। बैठक में उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिए कि जो शिक्षक चुनाव कार्य में संलग्न नहीं हैं, उनकी अनिवार्य उपस्थिति विद्यालय में सुनिश्चित की जाए।
बैठक में पीएम किसान ई-केवाईसी, अवमानना प्रकरण, अनुकंपा नियुक्ति एवं विभागवार लंबित पत्रकों की स्थिति की भी समीक्षा की गई। कलेक्टर ने कहा कि शासन की योजनाओं से संबंधित सभी कार्य समय-सीमा में पूर्ण होना अनिवार्य है।
उन्होंने जनजातीय कार्य विभाग को भी निर्देशित किया कि जिन छात्रावासों में मरम्मत कार्य आवश्यक हैं, उनके प्रस्ताव शीघ्र प्रशासन को भेजे जाएं ताकि कार्य निर्धारित अवधि में पूर्ण हो सकें। साथ ही, विद्यालय भवनों की मरम्मत प्रस्तावों में ढिलाई बरतने पर शिक्षा विभाग को फटकार लगाई।
बैठक के अंत में कलेक्टर वानखडे ने नरवाई जलाने वालों के विरुद्ध सख्त कार्यवाही के निर्देश देते हुए कहा कि दोषियों पर जुर्माना एवं एफआईआर दर्ज की जाएगी। उन्होंने कहा कि किसी भी स्थिति में पर्यावरण और फसल हानि पहुंचाने वाली गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
कलेक्टर वानखडे ने सभी अधिकारियों को चेतावनी दी कि शासन के निर्देशों के पालन में ढिलाई पाई गई तो व्यक्तिगत उत्तरदायित्व तय किया जाएगा। प्रशासन की प्राथमिकता है समय-सीमा में कार्य, जवाबदेही और पारदर्शिता।

