बिलासपुर, 11 नवम्बर (आरएनएस)। हाईकोर्ट के युवा अधिवक्ता *राहुल अग्रवाल* की संदिग्ध मौत का मामला अब गंभीर मोड़ ले चुका है। तीन दिन पहले रामसेतु पुल के नीचे उनका शव मिलने के बाद से ही इस घटना को लेकर कई तरह की चर्चाएं तेज हैं। शुरुआती जांच में पुलिस ने इसे *प्रेम प्रसंग से जुड़ा आत्महत्या का मामला* बताया था, लेकिन अधिवक्ता के परिजनों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। अब इस मामले में हाईकोर्ट के *सीनियर एडवोकेट्स का प्रतिनिधिमंडल* बिलासपुर कलेक्टर से मिला और *एसआईटी के माध्यम से निष्पक्ष जांच* की मांग की। जानकारी के मुताबिक, भाटापारा निवासी राहुल अग्रवाल पिछले सात वर्षों से छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में प्रैक्टिस कर रहे थे। घटना की रात वे अपने दोस्तों के साथ घूमने निकले थे, लेकिन देर रात तक घर नहीं लौटे। परिजनों ने जब खोजबीन की तो उनकी कार रामसेतु पुल पर खड़ी मिली और पुल के नीचे पानी में उनका शव तैरता मिला। स्थानीय युवकों की सूचना पर सिविल लाइन पुलिस मौके पर पहुंची और शव को बाहर निकालकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। *कपड़ों से पहचान की गई* और परिजनों को सूचित किया गया। अब, अधिवक्ता समुदाय का कहना है कि यह मामला संदिग्ध है और इसे आत्महत्या बताकर बंद नहीं किया जा सकता। कलेक्टर ने अधिवक्ताओं को आश्वासन दिया है कि *एसएसपी से चर्चा कर निष्पक्ष जांच कराई जाएगी।* इस घटना ने न केवल अधिवक्ता समाज में आक्रोश पैदा किया है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा किया है कि आखिर राहुल अग्रवाल की मौत के पीछे की सच्चाई क्या है।
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