जयपुर ,12 नवंबर(आरएनएस)। राजस्थान की राजधानी जयपुर एक बार फिर एक हाई-प्रोफाइल ठगी और रिश्वतखोरी मामले का केंद्र बनी है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने सोमवार को फर्जी अफसर बनकर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले अजीत कुमार पात्रा और उसके सहयोगी मिंकू लाल जैन को गिरफ्तार किया है। दोनों पर आरोप है कि वे खुद को केंद्र सरकार और प्रवर्तन एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी बताकर बड़े उद्योगपतियों और कारोबारियों से करोड़ों रुपये की वसूली करते थे। यह कार्रवाई तब शुरू हुई जब जीएसटी खुफिया महानिदेशालय (डीजीजीआई), जयपुर ने 4 नवंबर को मेसर्स साइबर नेटवर्क प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ विनोद परिहार के यहां छापा मारा था। सूत्रों के अनुसार, छापे के बाद गिरफ्तारी से बचने के लिए परिहार ने अजीत पात्रा से संपर्क किया, जिसने डीजीजीआई, जयपुर के अधिकारियों के नाम पर मामला निपटाने के लिए लाखों रुपये की मांग की।
सीबीआई ने बताया कि 10 नवंबर को अजीत पात्रा और मिंकू जैन को जयपुर के कारोबारी विनोद परिहार से 18 लाख रुपये की रिश्वत राशि प्राप्त करते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। यह रकम जगजीत सिंह गिल के जरिए भेजी गई थी। मौके से पूरी ट्रैप राशि बरामद कर ली गई।
फर्जी अफसर बनकर वीआईपी प्रोटोकॉल का दुरुपयोग
सीबीआई की जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी लंबे समय से एक संगठित नेटवर्क चला रहे थे। वे वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, मंत्रालयों और न्यायिक अधिकारियों का प्रतिरूपण करते हुए खुद को उच्च पदस्थ बताते थे। इसी फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर वे सरकारी आवासों में ठहरते, वीआईपी प्रोटोकॉल का लाभ उठाते और सार्वजनिक कार्यक्रमों व धार्मिक आयोजनों में प्रतिबंधित क्षेत्रों तक पहुंच प्राप्त करते थे।
जयपुर कड़ी से खुला पूरा नेटवर्क
सीबीआई सूत्रों के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क का खुलासा जयपुर से हुआ। यहां जीएसटी खुफिया विभाग की कार्रवाई के बाद यह साफ हुआ कि आरोपी जयपुर समेत कई शहरों में सक्रिय थे। जयपुर के अलावा दिल्ली और ओडिशा में भी छापेमारी की गई, जहां से सीबीआई ने करोड़ों रुपये की नकदी, सोने के जेवरात और संपत्तियों के दस्तावेज जब्त किए।
छापों में करोड़ों की बरामदगी
सीबीआई के अनुसार, तलाशी के दौरान
करीब 3.7 करोड़ रुपये नकद,
लगभग 1 किलोग्राम सोने के आभूषण,
26 संपत्तियों के दस्तावेज,
4 लग्जरी कारें और 12 अन्य वाहन,
तथा कई डिजिटल डिवाइस बरामद किए गए हैं।
इन संपत्तियों का मूल्यांकन फिलहाल जारी है। जांच एजेंसी यह भी पड़ताल कर रही है कि क्या राजस्थान में कुछ स्थानीय अधिकारी या निजी एजेंट इस गिरोह से जुड़े थे।
राजस्थान में जांच के नए सूत्र
सीबीआई के अधिकारी अब जयपुर, उदयपुर और अजमेर में उन व्यक्तियों और कंपनियों की जांच कर रहे हैं, जिनसे इस गिरोह ने संपर्क किया था। जांच यह भी पता लगाने की दिशा में है कि क्या जयपुर स्थित किसी प्रवर्तन या कर विभाग के नाम का दुरुपयोग अन्य मामलों में भी हुआ है।
सीबीआई की सख्त चेतावनी
सीबीआई ने बयान जारी कर कहा है कि किसी भी व्यक्ति या संस्था द्वारा केंद्रीय एजेंसियों या अधिकारियों का नाम लेकर किसी प्रकार का प्रभाव या समाधान का वादा किया जाता है तो उसे तुरंत स्थानीय पुलिस या सीबीआई को सूचित किया जाए।
जांच जारी
फिलहाल, दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया है, जहाँ से उन्हें सीबीआई रिमांड पर भेजा गया है। एजेंसी यह जांच कर रही है कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को ठगा और राजस्थान में किन-किन अधिकारियों और व्यापारिक नेटवर्क से संपर्क किया।
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