० पांच किमी पैदल सफर कर स्कूल का राशन ला रहे मासूम बच्चे, रास्ते में जंगली जानवरों का रहता है खतरा
नारायणपुर, 12 नवम्बर (आरएनएस)। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित अबूझमाड़ के घने जंगलों के बीच बसे तोयमेटा गांव से एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जो विकास के दावों की हकीकत को आइना दिखा रहा है। यहां प्राथमिक शाला तोयमेटा के मासूम बच्चे शिक्षा और पेट, दोनों की जरूरतें पूरी करने पांच घंटे पैदल चलकर जंगलों के रास्ते कुतुल बाजार तक पहुंचते हैं। उनका मकसद सिर्फ इतना होता है कि मध्यान भोजन के लिए चावल लाना, ताकि अगले दिन स्कूल में खाना बन सके। यह यात्रा किसी रोमांच नहीं, बल्कि संघर्ष और मजबूरी की कहानी है। बच्चे बताते हैं कि उन्हें नदी, नाला, पहाड़ और घने जंगलों से होकर गुजरना पड़ता है। रास्ते में भालू और अन्य जंगली जानवरों का डर हमेशा बना रहता है, लेकिन विकल्प न होने के कारण यह सफर तय करते हैं। नारायणपुर जिला मुख्यालय से कुतुल की दूरी लगभग 50 किलोमीटर है। वहीं कुतुल से तोयमेटा पहुंचने में बच्चों को लगभग पांच घंटे का वक्त लगता है। पहाड़ी रास्तों और कच्चे पगडंडियों से होकर गुजरते ये बच्चे कभी समूह में तो कभी अकेले इस कठिन सफर पर निकलते हैं। हाथों और कंधों में चावल की बोरी लिए बच्चों की तस्वीर अबूझमाड़ की शिक्षा व्यवस्था की सच्चाई बया करती है।
त्रिपाठी
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