मुंगेली, 13 नवम्बर (आरएनएस)। फास्ट ट्रैक कोर्ट मुंगेली ने एक बेहद संवेदनशील दुष्कर्म प्रकरण में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राकेश कुमार सोम की अदालत ने 62 वर्षीय मोहन जोशी को अपनी ही मूक-बधिर नातिन के साथ दुष्कर्म का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही अदालत ने आरोपी पर 2 हजार रुपये का अर्थदंड और पीडि़ता के पुनर्वास हेतु 5 लाख रुपये क्षतिपूर्ति की अनुशंसा भी की है।
यह मामला थाना फास्टरपुर क्षेत्र का है, जिसने फरवरी 2024 में पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया था। सत्र प्रकरण क्रमांक 23/2024 एवं दांडिक प्रकरण क्रमांक 1264/2024 राज्य बनाम मोहन जोशी में आरोपी मोहन जोशी, पीडि़ता का रिश्ते का नाना निकला। 21 फरवरी 2024 की दोपहर लगभग 12 बजे जब पीडि़ता घर में अकेली थी, तभी आरोपी मोहन जोशी मोटरसाइकिल से वहां पहुंचा और पानी मांगने के बहाने घर में घुस गया। जैसे ही पीडि़ता पानी लाने अंदर गई, उसने दरवाजा अंदर से बंद कर जबरन दुष्कर्म किया। पीडि़ता जन्म से ही श्रवण एवं वाक् दिव्यांग है। पति के लौटने पर उसने इशारों के माध्यम से पूरी घटना बताई, जिसके बाद तुरंत थाना फास्टरपुर में रिपोर्ट दर्ज कराई गई।
जांच के दौरान पुलिस ने मूक-बधिर विशेषज्ञ की मदद से पीडि़ता का बयान दर्ज किया और फोटो पहचान कराई, जिसमें उसने आरोपी की स्पष्ट पहचान की। अभियोजन पक्ष की ओर से लोक अभियोजक रजनीकांत सिंह ठाकुर ने अदालत में पीडि़ता के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और भौतिक साक्ष्य प्रस्तुत किए। अदालत ने सभी साक्ष्यों को विश्वसनीय मानते हुए आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(ठ) एवं अन्य धाराओं में दोषसिद्ध पाया। निर्णय सुनाते हुए न्यायाधीश सोम ने कहा कि ऐसे अपराध समाज की नैतिक जड़ों को हिला देते हैं, विशेषकर तब जब अपराधी पीडि़ता का ही रिश्तेदार हो। उन्होंने कहा, कानून के सामने न रिश्ता मायने रखता है, न उम्र और न ही पद — न्याय केवल अपराध के आधार पर होता है। यह फैसला न केवल पीडि़ता को न्याय दिलाने वाला है, बल्कि समाज के लिए भी एक सख्त संदेश है कि रिश्तों की आड़ में अपराध करने वालों के लिए कोई नरमी नहीं बरती जाएगी। अदालत ने शासन को निर्देश दिया है कि पीडि़ता को शीघ्र 5 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति राशि उपलब्ध कराई जाए, जिससे उसके पुनर्वास और उपचार में सहायता मिल सके।
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