कोलकाता 13 Nov, (Rns) । बंगाल में मतदान के लेकर तमाम तरह के आरोप प्रत्यारोप कोई नई बात नहीं है। लेकिन भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) को सूचित किया है कि 2009 में राष्ट्रीय पहचान प्रणाली शुरू होने के बाद से पश्चिम बंगाल में 34 लाख से अधिक आधार कार्ड धारक भूतिया यानी ‘मृत’ पाए गए हैं, जिससे भारत के मतदाता सूची और बायोमेट्रिक पहचान डेटाबेस में भारी विसंगतियां उजागर हुई हैं। कश्मीर मीडिया सर्विस के अनुसार, यूआईडीएआई अधिकारियों ने मतदाता सूची के चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बीच राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल के साथ एक बैठक के दौरान ये आँकड़े साझा किए। आँकड़ों से यह भी पता चला है कि राज्य में लगभग 13 लाख ऐसे लोग जिनके पास कभी आधार कार्ड नहीं था, इस योजना की शुरुआत के बाद से मर चुके हैं।यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब चुनाव आयोग को कई भारतीय राज्यों में फर्जी मतदाताओं, डुप्लिकेट प्रविष्टियों और अनुपस्थित मतदाताओं के बारे में बढ़ती शिकायतों का सामना करना पड़ रहा है। सीईओ कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि मृत नागरिकों पर यूआईडीएआई का डेटाबेस मतदाता सूची से फर्जी और डुप्लिकेट प्रविष्टियों की पहचान करने और उन्हें हटाने में मदद करेगा।
अधिकारियों ने बताया कि चुनाव आयोग ने सभी राज्यों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को यूआईडीएआई और बैंकों के साथ मिलकर मतदाता डेटा का सत्यापन और पहचान संबंधी विवरणों की दोबारा जाँच करने का निर्देश दिया है। बैंकों से उन खातों की जानकारी भी साझा करने को कहा गया है जिनमें वर्षों से अपने ग्राहक को जानो (केवाईसी) अपडेट नहीं हुए हैं। इस कदम का उद्देश्य उन मृत खाताधारकों की पहचान करना है जिनके नाम अभी भी सक्रिय मतदाता सूचियों में हैं। विश्लेषकों का कहना है कि इस खुलासे से भारत की बहुप्रचारित डिजिटल पहचान प्रणाली और उसके चुनावी रिकॉर्ड की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठते हैं, जिनकी लंबे समय से विसंगतियों और पारदर्शिता की कमी के लिए आलोचना की जाती रही है।
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