अजय दीक्षित
भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रतिवर्ष राज्यों में क्रम बार विधानसभा चुनाव होते रहते हैं जैसे अभी बिहार विधानसभा चुनाव हो रहे हैं आगामी साल में असम, पश्चिमी बंगाल,के चुनाव है । लेकिन 2014 से कांग्रेस और विपक्ष लगातार चुनाव हार रहा है जिसमें तीन आम चुनाव 2014,2019,2024 और शायद 80 से अधिक विधानसभा चुनाव सम्पन्न हो गए। अब तो हालत यह है कि राज्य सभा में विपक्ष की संख्या लगातार कम हो रही है।यह भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए शुभ संकेत नहीं है। ऐसा लगता है कि तमिलनाडु में डीएमके और पश्चिमी बंगाल में तृणमूल ही कुछ बेहतर प्रदर्शन कर सके हैं।इस वर्ष आम आदमी पार्टी दिल्ली में और बीजेडी ओडिशा में भी अपना प्रदर्शन कायम नहीं रख सकी है। चंद्रशेखर राव की भारत राष्ट्र समिति भी तीसरे स्थान पर पहुंच गई है।सबसे अधिक निराश कांग्रेस ने किया है जबकि इस समय मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ही है । बिहार विधानसभा चुनावों के परिणाम क्या होगे कह नहीं सकते लेकिन लगता है कि वहां भी कांग्रेस अपनी भागीदार पार्टी राजद को डूबा देगी क्योंकि हठधर्मी कर 62 सीट पर चुनाव लड़ बैठी है।2020 में 70 पर लड़ी थी और मात्र 19 जीत सकी थी। भारत के नक्शे में कर्नाटक, तेलंगाना, और हिमाचल प्रदेश में ही कांग्रेस की सरकार है जहां से 56 सीट लोकसभा की आती हैं।जबकि उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, महाराष्ट्र, दिल्ली,असम, नागालैंड, त्रिपुरा, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, सिक्किम, बिहार, ओडिशा, छत्तीसगढ़,में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है। पश्चिमी बंगाल, कर्नाटक, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर,में प्रमुख विपक्षी दल है । उत्तर प्रदेश, दिल्ली, जम्मू कश्मीर, बिहार, ओडिशा, पश्चिमी बंगाल, महाराष्ट्र, में कांग्रेस का वोट प्रतिशत 5 फीसदी से भी कम है। मप्र, गुजरात हरियाणा, जैसे प्रदेश में तीन या उससे अधिक बार लगातार कांग्रेस चुनाव हार गई है।
मप्र, राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, पंजाब,केरल, आंध्र प्रदेश,असम, नागालैंड त्रिपुरा मणिपुर मेघालय मिजोरम सिक्किम में दूसरे स्थान पर है।
कांग्रेस के साथ इस समय राजद, समाजवादी पार्टी,ही इसी पार्टियां हैं जो अपने राज्यों प्रभाव रखती हैं।
देश के आजादी के आंदोलन से निकली महात्मा गांधी, जवाहर लाल नेहरू, श्रीमती इंदिरा गांधी, सरोजनी नायडू, गोविंद बल्लभ पंत, मौलाना आजाद, कामराज नाडार, सरदार पटेल, निजलिगप्पा, की पार्टी को इतने खराब दिन देखने पड़ रहे हैं।
राज्य सभा भारत के लोकतांत्रिक व्यवस्था की रीढ़ है।अब इसमें भारतीय जनता पार्टी बहुमत में है क्योंकि राज्यों में उनकी सरकार है। राजसभा में भारतीय जनता पार्टी की 96 सीट है जबकि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन 122 सीट से बहुमत है ।250 सदस्यीय राज्यसभा में 27 कांग्रेस,13 तुलमुल,बीजेडी 05 ऐसे मिलकर विपक्ष 87 की संख्या में है।
विचार करे कभी कांग्रेस की राजसभा में 158 सीट थी लेकिन राज्यों में हार के बाद घटती गई अब मात्र 27 है।
उत्तर प्रदेश से भारतीय जनता पार्टी की 31 सीट है जो संपूर्ण भारत से कांग्रेस की 27 संख्या से अधिक है।
कांग्रेस की बागडोर राहुल गांधी के युवा कंधों पर है पर उन्हें अपने काम के प्रति रुचि नहीं है और वे महत्वपूर्ण मौका पर विदेश चले जाते हैं। दूसरे राज्यों के कांग्रेस क्षत्रप या तो बूढ़े हो गए हैं और युवा भी तो कोई प्रभाव नहीं है। उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र,गुजरात,पंजाब,दिल्ली, आंध्र प्रदेश, पश्चिमी बंगाल, ओडिशा में कोई बड़ा नाम नहीं है। राजस्थान, मप्र, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर, छत्तीसगढ़, झारखंड,का नेतृत्व बूढ़ा हो चुका है।नवीन कार्यकर्ता बनाने की कोई संस्था नहीं है।जैसे भारतीय जनता पार्टी के पास आरएसएस, एबीवीपी, और भी तमाम संगठन हैं। बताया जाता है कि 10लाख तो विद्या भारती के शिक्षक हैं। बनवासी कल्याण परिषद,आदि। बसंत साठे कभी कांग्रेस के विचारक रहे हैं। उन्होंने एक किताब लिखी है जिसमें कहा गया है कि कांग्रेस को तथाकथित धर्मनिरपेक्ष वादियों ने डुबो दिया।इन लोगों ने प्रमुख समुदाय हिंदुओं को नाराज कर दिया। जिससे संघ को आगे बढऩे का मौका दिया और अटल बिहारी वाजपेई, लालकृष्ण आडवाणी, सरीखे नेता ने अवसर को परिणाम में बदल दिया।
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