विस कोरांव और बारा को जनजाति हेतु आरक्षित किया जाय
प्रयागराज 14 नवंबर (आरएनएस )। एक ओर जहां देश अपनी आजादी की 75 वीं वर्षगांठ आजादी का अमृत महोत्सव पिछले वर्ष बड़े धूमधाम से मनाया वहीं दूसरी और संविधान के अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता व छुआछूतमुक्त भारत देश के साथ संविधान के अनुच्छेद 15 जातिविहीन भारत देश का निर्माण व संविधान के अनुच्छेद 39 (ख) जमीन और उद्योगों के राष्ट्रीयकरण के साथ-साथ संविधान के अनुच्छेद 13 रूढि़वादी प्रथा को समाप्त कर वैज्ञानिकता पर आधारित समाज निर्माण करना है। क्या केन्द्र और राज्य की सरकारे अपने सत्ता के दौरान संविधान के अनुच्छेद-13, 15, 17, 39 ख का शतप्रतिशत अनुपालन कराने में या तो फेल हुई है या उक्त अनुच्छेद में दिए गए प्राविधानों के विरुद्ध कार्य किये गए हैं। क्या केन्द्र और राज्य की ऐसी सरकारों को सत्ता में बने रहना चाहिये ?
संविधान के सम्मान में डा. अम्बेडकर वेलफेयर नेटवर्क (डॉन) के संस्थापक उच्च न्यायालय के अधिवक्ता आईपी रामबृज के नेतृत्व में यमुनापार की तहसील बारा, विकास खण्ड शंकरगढ़, जसरा, तहसील करछना स्थित विकास खंड चाका, कौंधियारा व करछना स्थित गांवों में संविधान के सम्मान में संविधान पदयात्रा निकाली जा रही है। संविधान पदयात्रा में यमुनापार को जिला घोषित करने, तहसील बारा, करछना, मेजा और कोरांव स्थित अनुसूचित जनजाति कोल को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने, विधानसभा बारा और कोरांव को अनुसूचित जनजाति हेतु सुरक्षित करने की मांग की। डॉन संस्थापक उच्च न्यायालय के अधिवक्ता आईपी रामबृज ने केंद्र और राज्य की सरकारों से मांग की है कि संविधान के अनुच्छेद 39 ख के तहत सम्पत्ति का बंटवारा होना चाहिए जिसके लिए जमीन और उद्योगो का राष्ट्रीयकरण जरूरी है। चकबंदी के उपरान्त निकली अतिरिक्त जमीनों बंजर परती, ऊसर, सीलिंग, भूदान और समाज कल्याण व ग्रामसमाज की जमीन एक अभियान चलाकर भूमिहीन खेतिहर मजदूरों में आवासीय और कृषि कार्य का पट्टा किया जाय।
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