लखनऊ 14 नवंबर (आरएनएस )। प्रदेश सरकार ने उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण निदेशालय से खाद्य प्रसंस्करण विभाग को अलग करते हुए एक स्वतंत्र खाद्य प्रसंस्करण निदेशालय स्थापित करने का निर्णय लिया है। मंत्रिपरिषद की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। यह निर्णय खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र से जुड़ी योजनाओं को अधिक प्रभावी और सुचारू रूप से लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।सरकार का कहना है कि नया निदेशालय स्थापित करने के लिए किसी नए भवन, स्थान या अधिकारियों-कर्मचारियों के अतिरिक्त पद सृजन की आवश्यकता नहीं होगी। इससे प्रशासनिक बोझ बढ़े बिना योजनाओं के संचालन में तेजी आएगी। उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति 2023 के लिए वर्ष 2025-26 में 300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिसका उपयोग अब अधिक संगठित और लक्षित तरीके से किया जा सकेगा।नये निदेशालय के गठन से खाद्य प्रसंस्करण से जुड़ी सभी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन संभव होगा। व्यवस्थित और समुचित धनराशि का प्रयोग सुनिश्चित होने से प्रदेश के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के उद्यमियों को अनुदान का सीधा लाभ मिलेगा। साथ ही, इस क्षेत्र में निवेश बढऩे से बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे, जिससे प्रदेश का जनमानस सीधे लाभान्वित होगा।इस प्रस्ताव को मंत्रिपरिषद में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, जो खाद्य प्रसंस्करण विभाग के मंत्री भी हैं, की पहल पर प्रस्तुत किया गया, जिसे कैबिनेट ने सर्वसम्मति से मंजूरी प्रदान की।
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