लखनऊ 14 नवंबर (आरएनएस )। उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए मत्स्य विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक शुक्रवार को विधान भवन स्थित सभा कक्ष में कैबिनेट मंत्री संजय निषाद की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में मत्स्य क्षेत्र के विकास, पट्टा आवंटन में पारदर्शिता, उत्पादन वृद्धि, मत्स्य किसानों के सशक्तिकरण तथा विभागीय योजनाओं के आधुनिकीकरण पर विस्तृत चर्चा हुई।बैठक में मंत्री संजय निषाद ने राजस्व विभाग को सुझाव देते हुए कहा कि पट्टा आवंटन प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन किया जाए, हर चरण की समय-सीमा तय हो और व्यापक प्रचार-प्रसार के साथ इसे सरल बनाया जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में मत्स्य पालन को कृषि का दर्जा दिया जा चुका है, ऐसे में मत्स्य पालकों को बिजली, सोलर पम्प सहित कृषि श्रेणी में मिलने वाले सभी लाभ उपलब्ध कराए जाएँ। इसके साथ ही मत्स्य पालकों के नियमित प्रशिक्षण पर भी बल दिया गया।मत्स्य किसान क्रेडिट कार्ड की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए तैयार किए गए पोर्टल को जल्द ऑनलाइन किए जाने के निर्देश भी दिए गए। मंत्री ने कहा कि प्रदेश के बड़े जल क्षेत्र सेंचुरी क्षेत्रों में आ जाने से मत्स्य आखेट पर रोक लगी है, इसलिए जहाँ संभव हो वहाँ मत्स्य आखेट पुन: शुरू कराने की दिशा में प्रयास किए जाएँ। उन्होंने यह भी कहा कि बड़े शहरों और जलाशयों के समीप प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने पर विचार किया जाए, ताकि मत्स्य उत्पादों की वैल्यू चेन सुदृढ़ हो सके।
मत्स्य बीज आपूर्ति में उपयोग होने वाली पॉलिथीन की जगह पर्यावरण अनुकूल विकल्पों पर भी ध्यान देने के निर्देश दिए गए।मुख्यमंत्री के आर्थिक सलाहकार अवनीश अवस्थी ने सुझाव दिया कि प्रदेश के मत्स्य पालकों को झींगा बीज उपलब्ध कराने के लिए निगम की हैचरियों को मजबूत किया जाए और झींगा पालन को बड़े स्तर पर बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने मोती पालन, केज कल्चर, मत्स्य बीज व मत्स्य आहार के मानकीकरण और प्रतिबंधित थाई मांगुर पर पूर्ण प्रतिबंध को कठोर रूप से लागू करने की आवश्यकता बताई। अवस्थी ने कहा कि प्रत्येक पट्टाधारक और निजी तालाबों में एरेटर लगाने पर अनुदान देने के लिए बजट प्रावधान किया जाए।उन्होंने जिला स्तर पर राजस्व, पंचायतीराज, मत्स्य विभाग और अन्य संबंधित विभागों की संयुक्त टीम बनाकर पट्टा आवंटन की प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाने का सुझाव दिया। साथ ही वर्ष 2026-27 के बजट के लिए नई योजनाओं, प्रशिक्षण, और अन्य राज्यों के सर्वोत्तम मॉडल का अध्ययन कर प्रस्ताव तैयार करने को कहा।मत्स्य उत्पादन के सटीक आंकड़ों के लिए एक मोबाइल ऐप विकसित करने के निर्देश भी डिलॉइट को दिए गए।प्रमुख सचिव मुकेश मेश्राम ने अवगत कराया कि ग्राम समाज के तालाबों का जियो-टैगिंग कार्य राजस्व विभाग द्वारा पूरा कर लिया गया है। अब मनरेगा के माध्यम से तालाबों का सुधार और अमृत सरोवरों को मत्स्य पालन योग्य बनाने की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि नदियों की नीलामी से प्राप्त मत्स्य विकास निधि के उपयोग पर आदेश जारी किए जाएँ और समिति व व्यक्तिगत पट्टाधारकों के लगान में विसंगतियों को दूर करने पर विचार किया जाए। उन्होंने तिलपिया उत्पादन बढ़ाने और मत्स्य पालकों को इस दिशा में प्रशिक्षित करने पर भी जोर दिया।बैठक में निदेशक मत्स्य ने बताया कि वर्ष 2024-25 में विभाग को 21,000 करोड़ रुपये का जीएसवीए लक्ष्य मिला था, जिसके विरुद्ध 23,000 करोड़ रुपये की उपलब्धि हासिल की गई। वर्ष 2025-26 के लिए जीएसवीए लक्ष्य 27,000 करोड़ रुपये तय किया गया है, जबकि मत्स्य उत्पादन का लक्ष्य 15.40 से 15.70 लाख टन रखा गया है।बैठक में आयुक्त राजस्व परिषद कंचन, महानिदेशक मत्स्य, विभागीय निदेशकगण, उप निदेशकगण, मत्स्य निगम से वरिष्ठ अधिकारी तथा डिलॉइट टीम के सदस्य उपस्थित रहे।
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