मोतीपुर (मुजफ्फरपुर) 16 Nov, (Rns): मोतीपुर बाजार स्थित एक मकान में संदिग्ध हालात में लगी आग में पांच लोग जिंदा जल गए। घटना मोतीपुर नगर परिषद के वार्ड-13 के नेता रोड स्थित दिवंगत गेना साह के मकान की है। गेना साह डीलर थे और करीब पांच वर्ष पहले उनका निधन हो गया था। उनके बड़े बेटे ललन साह और छोटे बेटे मुकेश उर्फ अर्जुन की उसी मकान के ग्राउंड फ्लोर पर किराना दुकान है। पहले तल्ले पर बच्चों का निजी अस्पताल चलता है, जबकि दूसरे तल्ले पर ललन साह अपने परिवार के साथ रहते थे।
घटना के समय ललन अपनी पत्नी व दो बेटियों के साथ एक कमरे में सोए हुए थे। उनकी मां दूसरे कमरे में थीं। वहीं तीसरे कमरे में ललन के मामा-मामी और उनके बच्चे थे। ललन की बहन माला देवी भी वहीं सोई थीं। छोटा भाई मुकेश दुकान के साथ स्थित कमरे में नीचे सोया था। आग की सूचना मिलते ही वह बचाने के प्रयास में झुलस गया।
सुबह लगभग चार बजे आसपास के लोगों को चिल्लाने की आवाज सुनाई दी। जब वे पहुंचे तो मकान के ऊपरी हिस्से में आग तेजी से फैल चुकी थी और कई लोग अंदर फंसे हुए थे। तुरंत मोतीपुर पुलिस और अग्निशमन दल को सूचना दी गई। हालांकि पहले तल्ले पर स्थित अस्पताल को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। घटना के समय वहां केवल एक अटेंडेंट मौजूद था।
सूचना पर डीएसपी पश्चिमी सुचित्रा कुमारी और अंचलाधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। झुलसे लोगों में लालबाबू साह (45), पुष्पा देवी (42), माला देवी (28), साक्षी कुमारी (18) और अर्जुन कुमार (20) शामिल हैं।
दीवार और एसबेस्टस तोड़कर बुझाई गई आग
मौके पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग जुट गए। धुआं अधिक होने के कारण सीढ़ियों से ऊपर जाना मुश्किल था। अग्निशमन टीम ने बगल की छत से लालबाबू प्रसाद के घर तक पहुंचकर एसबेस्टस और दीवार तोड़कर भीतर रास्ता बनाया, जिसके बाद पानी की बौछार कर आग पर काबू पाया गया।
जिलाधिकारी ने घटना की जानकारी मिलते ही एसकेएमसीएच प्रशासन को अलर्ट कर दिया। अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. सतीश कुमार सिंह के अनुसार, तीन मरीज 70 प्रतिशत तक झुलस गए हैं, जबकि एक 80 प्रतिशत तक जल चुका है। सभी की स्थिति गंभीर है। एक घायल को पटना रेफर किया गया है।
नेपाल से बीमार चाचा को देखने आई थी माला
झुलसी माला देवी ने बताया कि वह बीमार चाचा को देखने नेपाल से आई थी। चाचा और बुआ दोनों की तबीयत खराब थी, इसलिए वह रुक गई थी। सुबह करीब साढ़े चार बजे धमाके जैसी आवाज से उसकी नींद खुली। देखा कि पूरा कमरा धुएं और आग से घिर चुका था। बाहर निकलने की कोशिश में वह गिर पड़ी, लेकिन किसी तरह चाची पुष्पा के साथ बाहर निकलने में सफल हुई। चाचा लालबाबू प्रसाद भी भागते समय गंभीर रूप से झुलस गए।

