ऋषिकेश,16 नवंबर (आरएनएस)। रसायन एवं पेट्रोरसायन विभाग की ओर से केंद्रीय प्लास्टिक इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (सिपेट) और फिक्की के सहयोग से राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें वक्ताओं ने पेट्रोरसायन एवं प्लास्टिक क्षेत्र में पुनर्चक्रण, प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन और चक्रीय अर्थव्यवस्था आदि पर मंथन किया। शनिवार देर रात डोईवाला स्थित सिपेट संस्थान में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रसायन एवं पेट्रोरसायन विभाग की सचिव निवेदिता शुक्ला वर्मा ने कहा कि कार्बन कैप्चर एवं उपयोग ढांचा, हरित भारत मिशन, बायोप्लास्टिक नीति, मजबूत ईपीआर मानदंड और वेस्ट टू वेल्थ जैसे कार्यक्रम देश में प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन को नई दिशा दे रहे हैं। उन्होंने सिपेट और भारतीय पेट्रोलियम संस्थान की भूमिका को स्वच्छ तकनीक और सर्कुलर इकोनॉमी के विकास में महत्वपूर्ण बताया और उद्योग से नवाचार पर आधारित पुनर्चक्रण तकनीकों और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को तेजी से अपनाने पर जोर दिया। कहा कि सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य उद्योग के लिए स्थायी और चक्रीय विकास मॉडल को मजबूत करना तथा उद्योग को अकादमिक सहयोग को बढ़ावा देना है। सम्मेलन में विशेषज्ञों ने टिकाऊ विनिर्माण, पुनर्चक्रण क्षमता में वृद्धि, प्लास्टिक अपशिष्ट से ऊर्जा और उपयोगी उत्पाद बनाने, तथा जिम्मेदार उत्पादन व्यवस्था को मजबूत करने जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की। वक्ताओं ने कहा कि ऐसे मंच नीति, शोध और उद्योग जगत के बीच तालमेल को और मजबूत करते हैं तथा भारत को हरित और प्रतिस्पर्धी पेट्रोकेमिकल सेक्टर की दिशा में आगे बढ़ाते हैं। मौके पर डीसीपीसी संयुक्त सचिव दीपक मिश्रा, फिक्की पेट्रोकेमिकल्स एवं प्लास्टिक समिति अध्यक्ष प्रभा दास, अखिल भारतीय प्लास्टिक निर्माता संघ अध्यक्ष अरविंद मेहता, सिपेट महानिदेशक प्रो. शिशिर सिन्हा, बीसीजी पार्टनर नितेश शर्मा, फिक्की महिला संगठन उत्तराखंड अध्यक्ष गीता खन्ना, सिपेट देहरादून निदेशक डॉ. प्रताप चंद पाढ़ी, तकनीकी अधिकारी पंकज फुलारा, व्याख्याता समीर पुरी, तकनीकी अधिकारी पार्थ सारथी दास आदि उपस्थित रहे।
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