चंडीगढ़ 18 Nov, (Rns)- हरियाणा के सूरजकुंड में उत्तरी क्षेत्रीय परिषद की 32वीं बैठक आयोजित की गई। इसमें हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा है कि राष्ट्र की प्रगति के लिए राज्यों का आपसी सहयोग आवश्यक है।
|मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा लगातार दिल्ली को अपने हिस्से से अधिक पानी दे रहा है, जबकि एसवाईएल नहर निर्माण के अभाव में पंजाब से उसका वैधानिक हिस्सा नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने पंजाब से जल विवादों पर चर्चा करते समय गुरुओं की महान परंपराओं को याद रखने का आग्रह किया और कहा कि जल एक साझा संसाधन है, जिसकी स्वच्छता और उपलब्धता की जिम्मेदारी सभी राज्यों की है। सैनी ने सुझाव दिया कि यदि हरियाणा के कुछ कॉलेज पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ से संबद्ध हो जाते हैं, तो इससे विश्वविद्यालय और प्रदेश के छात्रों दोनों को लाभ मिलेगा। उन्होंने बताया कि सरकार ने संकल्प पत्र के 217 वादों में से 47 को एक वर्ष में पूरा किया है। ‘दीन दयाल लाडो लक्ष्मी’ ऐप लॉन्च करने और 5,22,162 महिला लाभार्थियों को 2,100 रुपये की राशि स्थानांतरित करने का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि अब तक 8.05 लाख आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। सैनी ने कहा कि हरियाणा ने सभी एजेंडा बिंदुओं पर विस्तृत टिप्पणियां दी हैं, और उम्मीद जतायी कि इस बैठक से सहकारी संघवाद को नयी दिशा मिलेगी तथा अंतर-राज्यीय मुद्दों के समाधान में सहमति बनेगी। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने सोमवार को यहां उत्तरी क्षेत्रीय परिषद की 32वीं बैठक में पंजाब विश्वविद्यालय, नदी जल पर अपना दावा दोहराया और देश में वास्तविक संघीय ढांचे की वकालत की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान में स्पष्ट रूप से उन क्षेत्रों का सीमांकन किया गया है, जिनमें केंद्र और राज्यों को अपने-अपने अधिकारों का प्रयोग करना है। उन्होंने कहा कि संघवाद हमारे संविधान के बुनियादी स्तंभों में से एक है, लेकिन दुर्भाग्य से, पिछले 75 वर्षों के दौरान सत्ता के केंद्रीकरण की प्रवृत्ति रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के पुनर्गठन के बाद 1970 के इंदिरा गांधी समझौते में स्पष्ट रूप से कहा गया था, “चंडीगढ़ का राजधानी परियोजना क्षेत्र, समग्र रूप से, पंजाब को जाएगा, जो कि केंद्र सरकार की स्पष्ट प्रतिबद्धता थी।” उन्होंने कहा कि 24 जुलाई, 1985 को तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी और संत हरचंद सिंह लोंगोवाल के बीच हस्ताक्षरित राजीव-लोंगोवाल समझौते ने स्पष्ट रूप से पुष्टि की कि चंडीगढ़ पंजाब को हस्तांतरित किया जाएगा। हालांकि, मान ने दुख जताया कि सभी वादों के बावजूद चंडीगढ़ पंजाब को हस्तांतरित नहीं किया गया, जिसने हर पंजाबी की मानसिकता को ठेस पहुंचाई है।
केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के कामकाज में पंजाब और हरियाणा के सैन्यकर्मियों की भर्ती में 60:40 के अनुपात को यथावत बनाये रखने का मुद्दा उठाते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि यह गंभीर चिंता का विषय है कि चंडीगढ़ प्रशासन में आईएएस और पीसीएस अधिकारियों को प्रमुख पदों से बाहर रखा गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक और जुड़ा हुआ मुद्दा एफसीआई (पंजाब) के महाप्रबंधक के पद पर पंजाब कैडर के अधिकारियों की नियुक्ति है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय पूल में पंजाब राज्य के लगातार सर्वोच्च योगदान को देखते हुए, भारत सरकार को एफसीआई के क्षेत्रीय कार्यालय में पंजाब कैडर के एक आईएएस अधिकारी की नियुक्ति की स्थापित प्रवृत्ति में कोई बाधा नहीं डालनी चाहिए।
वहीं, हिमाचल के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने चंडीगढ़ की भूमि और परिसंपत्तियों में हिमाचल प्रदेश के 7.19 प्रतिशत हिस्से के वैध अधिकार की पुरजोर वकालत की है। यह पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 के तहत अनिवार्य है। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के 2011 के उस निर्णय का भी हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि पंजाब पुनर्गठन अधिनियम के तहत जनसंख्या अनुपात हस्तांतरण के आधार पर हिमाचल प्रदेश संयुक्त पंजाब में 7.19 प्रतिशत हिस्सेदारी का हकदार है और यही बीबीएमबी द्वारा उत्पादित विद्युत में वैध हिस्सेदारी का आधार भी है। ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू सोमवार को हरियाणा के फरीदाबाद में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित उत्तरी क्षेत्रीय परिषद की 32वीं बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) से लंबित बकाया राशि जारी करने और बीबीएमबी में हिमाचल से एक स्थायी सदस्य की नियुक्ति की भी मांग की। उन्होंने केंद्र द्वारा संचालित जल विद्युत परियोजनाओं में राज्य को 12 प्रतिशत मुफ्त बिजली रॉयल्टी देने की नीति को लागू करने और उन परियोजनाओं में हिमाचल की मुफ्त रॉयल्टी को बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने का भी आग्रह किया, जिनकी लागत पहले ही वसूल हो चुकी है। उन्होंने आग्रह किया कि हिमाचल प्रदेश को उसका वैध हक मिले, यह सुनिश्चित करने के लिए इस मुद्दे को उत्तरी क्षेत्रीय परिषद की अगली बैठक के एजेंडा में रखा जाए।

