वाशिंगटन ,18 नवंबर। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक और बड़ा बयान देकर अपनी ही इंडस्ट्री को कठघरे में खड़ा कर दिया है। इस बार उन्होंने अमेरिकी चिप मेकिंग उद्योग को लेकर खूब खरी-खोटी सुनाई। साथ ही, उन्होंने ॥-1क्च प्रवासी श्रमिकों के प्रति अपने समर्थन का बचाव करते हुए एक हैरान करने वाला तर्क दिया कि अमेरिकियों को ‘माइक्रोचिप बनाना नहीं आताÓ।
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब अमेरिका अपने घरेलू सेमीकंडक्टर चिप उद्योग के पुनर्निर्माण का प्रयास कर रहा है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी कार्यबल (ङ्खशह्म्द्मद्घशह्म्ष्द्ग) में सेमीकंडक्टर विनिर्माण के लिए आवश्यक तकनीकी कौशल का अभाव है, जो एक महत्वपूर्ण उद्योग है।
ट्रंप ने कहा, अमेरिका अब ज्यादा चिप का निर्माण नहीं करता है। अगर आप चिप बनाने जा रहे हैं तो हमें अपने लोगों को चिप बनाने की ट्रेनिंग देनी होगी, क्योंकि हमने चिप वाला कारोबार ताइवान के हाथों बहुत ही मूर्खतापूर्ण तरीके से गंवा दिया है। हालांकि, ट्रंप ने दावा किया कि यह सेक्टर अमेरिका में बड़े स्तर पर वापसी करेगा और उन्होंने कुछ ही सालों के भीतर घरेलू उत्पादन में ग्रोथ का अनुमान लगाया है।
दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप ने 2022 के ‘चिप्स अधिनियमÓ (ष्ट॥ढ्ढक्कस् ्रष्ह्ल) को खारिज कर दिया, जिसका उद्देश्य अमेरिकी विनिर्माण को बढ़ावा देना था। ट्रंप ने कहा, चिप्स एक्ट एक आपदा थी। सभी चिप बनाने वाली कंपनियां वापस आ रही हैं और शायद दुनिया में ज्यादातर चिप निर्माण अमेरिका में ही होगा।
ट्रंप के इस बयान के बाद अमेरिका में सियासत गरमा गई है और उनके रिपब्लिकन सहयोगियों की ओर से ही आलोचना शुरू हो गई है। फ्लोरिडा के गवर्नर रॉन डेसेंटिस ने 13 नवंबर को एक पोस्ट में कहा कि कांग्रेस में रिपब्लिकन बहुमत में हैं और वे ॥-1क्च को समाप्त करने के लिए कानून बना सकते हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, यहां शब्दों का नहीं, बल्कि कार्यों का महत्व है।
वहीं, एक अन्य अधिकारी ने ट्रंप को याद दिलाया कि माइक्रोचिप का आविष्कार करने का श्रेय जिन दो लोगों को दिया जाता है, वे जैक किल्बी और रॉबर्ट नॉयस थे, जो अमेरिकी इंजीनियर थे और अमेरिका की धरती पर ही काम कर रहे थे।
इन आलोचनाओं के बावजूद, ट्रंप अपने इंडस्ट्री को लेकर दिए गए नजरिए पर कायम दिखे। उन्होंने कहा, अच्छी खबर यह है कि सब कुछ वापस आ रहा है। यह तो हमेशा से यहीं (अमेरिका में) होना चाहिए था।
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