कुशीनगर, 18 नवम्बर (आरएनएस)। जनपद के कप्तानगंज नगर पंचायत में निराश्रित पशुओं के लिए बनाए गए कान्हा पशु आश्रय स्थल के कारनामे का एक बड़ा खुलासा सामने आया है। जांच में पता चला है कि नगर पंचायत अध्यक्ष सुशीला खेतान की दो गायें सरकारी गौशाला में न सिर्फ पाली जा रही है। बल्कि इनमें से एक साहीवाल नस्ल की गाय प्रतिदिन 8 से 9 लीटर दूध देती है। जिसका दूध सीधे चेयरमैन के घर भेजा जाता है।
बताते चलें कि उक्त मामला तब सामने आया जब उत्तर प्रदेश गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष अतुल सिंह बीते शनिवार को खड्डा, कोप जंगल एवं पडरौना सहित विभिन्न गौशालाओं का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के उपरांत टीम ने कप्तानगंज स्थित कांन्हा गौशाला की भी पड़ताल की। शुरुआत में कर्मचारियों ने भीतर जाने से रोका, लेकिन गौशाला इंचार्ज गिरिजेश तिवारी से बातचीत के बाद टीम को अंदर प्रवेश मिला। गौशाला इंचार्ज ने बताया कि आश्रय स्थल में कुल 32 निराश्रित सांड़ और 3 मादा पशु हैं। उनका दावा था कि दूध देने वाली गाय पहले निराश्रित थी और इलाज के बाद दूध देने लगी। लेकिन जांच में उजागर हुआ कि एक साहीवाल नस्ल की गाय और एक अन्य गाय नगर पंचायत अध्यक्ष सुशीला खेतान की निजी गायें हैं। दोनों गायें सरकारी चारा, भूसा और गौशाला कर्मचारियों की देखरेख में पाली जा रही थी। गौशाला में भूसा, चोकर और हरे चारे की पर्याप्त व्यवस्था दिखाई दी। निराश्रित पशु टिन शेड के बाड़ों में बंधे थे। जहां ठंड से बचाव के लिए तिरपाल लगाए गए थे। कर्मचारियों के अनुसार पशुओं को प्रतिदिन 200 ग्राम चोकर, गुड़, हरी घास और करीब 4 किलो भूसा दिया जाता है। यहां चार कर्मचारी नियमित रूप से पशुओं की सेवा में लगे रहते हैं।निरीक्षण के बाद उपाध्यक्ष गौसेवा आयोग अतुल सिंह ने जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट सभागार में गोवंश संरक्षण अनुश्रवण समिति के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की और कई अनियमितताओं पर जांच कर कार्रवाई का निर्देश दिया। हालांकि सरकारी पशु आश्रय स्थल में निजी गायों को रखकर दूध का उपयोग घर भेजे जाने का मामला अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बन चुका है। प्रशासनिक स्तर पर आगे क्या कार्रवाई होती है। यह देखना महत्वपूर्ण है। इस संबंध में बात की गई तो अधिशासी अधिकारी नगर पंचायत (ईओ) योगेश मिश्रा ने कहा कि गौशाला में केवल निराश्रित पशु ही रखे जाने का नियम है। उन्होंने दावा किया कि नगर पंचायत अध्यक्ष सुशीला खेतान अपनी निजी गायों का हरा चारा और खर्च खुद वहन करती हैं। वे क्षेत्र की प्रतिष्ठित नागरिक हैं और पशुओं की देखभाल का खर्च उठाने में पूरी तरह सक्षम है।
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