लखनऊ 19 नवंबर (आरएनएस )। राजधानी के विक्रमादित्य मार्ग पर बुधवार दोपहर एक सनसनीखेज घटना सामने आई, जब मथुरा निवासी माँ–बेटे ने कथित रूप से जहरीला पदार्थ खाकर अपनी जान देने की कोशिश की। अचानक बिगड़ी तबीयत के बाद राहगीरों ने पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद मौके पर पहुंची बंदरिया बाग चौकी पुलिस ने दोनों को तुरंत सिविल अस्पताल पहुँचाया। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और लोग देर तक चर्चा करते रहे कि आखिर ऐसा कदम उठाने की नौबत कैसे आ गई।घटना आज दिनांक 19 नवंबर 2025 की दोपहर लगभग 11:30 बजे की है। जहरीला पदार्थ खाने वालों की पहचान 55 वर्षीय मुनेश सिंह पत्नी स्व. राजवीर सिंह और उनके 38 वर्षीय पुत्र बलजीत सिंह के रूप में हुई है। दोनों एफ-49 राधारानी टाउनशिप, बरसाना, जिला मथुरा के निवासी हैं और किसी कार्य से लखनऊ आए हुए थे। अचानक सड़क किनारे उनकी तबीयत खराब होने पर लोग घबरा गए और तुरंत पुलिस को सूचना दी। इसके बाद चौकी इंचार्ज उ.नि. आदित्य सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे और बिना देर किए दोनों को सिविल अस्पताल में भर्ती कराया। अस्पताल में डॉक्टरों की टीम उनका उपचार कर रही है तथा उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।घटना के पीछे गहरा विवाद छिपा हुआ है। प्रारंभिक जानकारी में सामने आया है कि मथुरा में उनके एक प्लॉट पर किसी व्यक्ति द्वारा कथित कब्जा कर लिया गया है। बताया जाता है कि इस कब्जे के कारण दोनों काफी समय से तनाव में थे। जमीन विवाद से दुखी होकर उन्होंने कथित रूप से यह खतरनाक कदम उठाया। यह भी जांच का विषय है कि दोनों किस उद्देश्य से लखनऊ आए थे—क्या वे किसी अधिकारी से मिलने आए थे, या यह कदम दबाव बनाने के उद्देश्य से उठाया गया।
पुलिस ने घटना को गंभीर मानते हुए तत्काल मथुरा पुलिस से संपर्क साधा है, ताकि प्लॉट विवाद की वास्तविक स्थिति और शामिल लोगों की जानकारी प्राप्त की जा सके। पुलिस का कहना है कि अस्पताल में दोनों की हालत स्थिर होने पर उनके बयान दर्ज किए जाएंगे, जिससे पूरी घटना की सच्चाई सामने आ सके। फिलहाल मौके से किसी प्रकार का जहरीला पदार्थ बरामद होने की जानकारी नहीं मिली है, लेकिन पुलिस इसे भी जांच का हिस्सा मानकर आगे बढ़ रही है।इस घटना ने एक बार फिर दिखाया है कि भूमि विवाद किस तरह लोगों को मानसिक रूप से तोड़ देता है और चरम कदम उठाने तक मजबूर कर देता है। प्रशासन और पुलिस पर अब यह जिम्मेदारी है कि मामले की गहन जांच कर पीडि़तों को न्याय दिलाया जाए और ऐसे विवादों में समय रहते प्रभावी हस्तक्षेप सुनिश्चित किया जाए।लखनऊ के व्यस्त विक्रमादित्य मार्ग जैसी जगह पर आत्महत्या का प्रयास निश्चित रूप से एक गंभीर चेतावनी है कि विवादों के समाधान में देरी कई बार जानलेवा स्थितियों को जन्म दे सकती है। मामले की आगे की कार्रवाई पुलिस की जांच रिपोर्ट के बाद स्पष्ट होगी।
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