रायपुर 20 अप्रैल (आरएनएस) नवा रायपुर से निकले एक वीडियो ने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी और आखिरकार लापरवाही की कीमत अधिकारियों को सस्पेंशन के रूप में चुकानी पड़ी, मामला छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल का है जहां 17 अप्रैल 2026 को तोरण साहू द्वारा सोशल मीडिया पर डाला गया वीडियो सीधे प्रशासनिक कामकाज पर सवाल खड़े कर गया, वीडियो में मंडल के काम में देरी और फाइलों के लटकने की बात सामने आई, जिसके बाद मामला तूल पकड़ता गया और जांच में जो सामने आया उसने अफसरशाही की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए, जानकारी के मुताबिक बिलासपुर क्षेत्र के एक फ्लैट से जुड़ा नामांतरण और संपत्ति दस्तावेज़ का मामला महीनों तक अटका रहा, फाइल 11 नवंबर 2025 से ही लंबित थी लेकिन जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई करने के बजाय उसे दबाकर बैठे रहे, यहां तक कि आवेदक को समय पर सूचना तक नहीं दी गई, जबकि नियमों के तहत नोटिस और प्रक्रिया पूरी कर फाइल का निपटारा किया जाना था, जांच में खुलासा हुआ कि संबंधित संपदा अधिकारी और कार्यालयीन स्टाफ ने न सिर्फ लापरवाही बरती बल्कि प्रक्रिया को जानबूझकर लंबा खींचा, जिससे आम नागरिक को परेशानी झेलनी पड़ी, जैसे ही यह पूरा मामला सामने आया और वीडियो के जरिए सार्वजनिक हुआ, हाउसिंग बोर्ड मुख्यालय हरकत में आया और तत्काल प्रभाव से कड़ी कार्रवाई करते हुए संपदा अधिकारी एल.पी. बाजारे को निलंबित कर दिया गया, साथ ही इस पूरे मामले में संलिप्त वरिष्ठ सहायक पुष्पम बाजारे को भी सस्पेंड कर दिया गया, आदेश आयुक्त स्तर से जारी हुआ और स्पष्ट किया गया कि यह कार्रवाई तत्काल प्रभाव से लागू रहेगी, इस पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया कि अब फाइल दबाने और लापरवाही करने वाले अफसरों पर सीधे कार्रवाई होगी, वहीं यह मामला प्रशासन के लिए भी एक सख्त संदेश बनकर उभरा है कि डिजिटल दौर में एक वीडियो भी सिस्टम की नींद उड़ा सकता है, अब सवाल यही है कि क्या इस कार्रवाई के बाद बाकी दफ्तरों में भी फाइलों की रफ्तार बढ़ेगी या फिर यह सिर्फ एक उदाहरण बनकर रह जाएगा, लेकिन फिलहाल इतना तय है कि जनता की आवाज अब सीधे सस्पेंशन तक पहुंच रही है।


