-बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल सीटों पर एआईएमआईएम लड़ेगी चुनाव
कोलकाता 19 नवंबर (आरएनएस)। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तारीख का भले ही अभी ऐलान नहीं हुआ है। लेकिन माना जा रहा है कि एसआईआर के बाद ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी और भाजपा के बीच यहां कड़ा मुकाबला है। कांग्रेस भी दोनों दलों को टक्कर देगी। तीन मुख्य पार्टियों के बीच होने वाले चुनाव में अब ट्विस्ट आ गया है। कांग्रेस, भाजपा और टीएमसी को टक्कर देने के लिए असदुद्दीन ओवैसी भी मैदान में उतरने वाले हैं। ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन विधानसभा चुनावों में ताल ठोकने की तैयारी में हैं। इसके लिए पार्टी की तैयारियां भी जोरों पर हैं। असदुद्दीन ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) ने वर्ष 2026 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए पश्चिम बंगाल के दो अल्पसंख्यक बहुल जिलों माल्दा और मुर्शिदाबाद में संगठन विस्तार की प्रक्रिया तेज कर दी है। पार्टी का विशेष फोकस माल्दा जिले पर है, जहां राज्य नेतृत्व ने ब्लॉक अध्यक्षों और उपाध्यक्षों की नियुक्ति की घोषणा शुरू कर दी है। हाल ही में संपन्न हुए बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी ने शानदार प्रदर्शन किया था और अल्पसंख्यक बहुत क्षेत्र में आरजेडी को भारी नुकसान पहुंचाया था। एआईएमआईएम माल्दा के जिलाध्यक्ष रिजायुल करीम के अनुसार, पार्टी नेतृत्व जिले की सभी 12 विधानसभा सीटों पर प्रत्याशी देने को लेकर आश्वस्त है। उन्होंने कहा कि पार्टी अपने चुनाव अभियान में राज्य स्तर पर तृणमूल कांग्रेस सरकार के भ्रष्टाचार को प्रमुख मुद्दे के रूप में उठाएगी, जबकि जिला स्तर पर सामाजिक बुनियादी ढांचे की बदहाल स्थिति को मुद्दा बनाया जाएगा। रिजायुल करीम का दावा है कि मालदा में पार्टी अन्य दलों के वोटरों को अपने पक्ष में आकर्षित करने में सफल होगी। पार्टी के एक अन्य नेता के मुताबिक, मालदा के अलावा एआईएमआईएम की योजना माल्दा से सटे अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की कुछ सीटों पर भी उम्मीदवार उतारने की है, हालांकि वहां किन सीटों पर चुनाव लडऩा है, यह फैसला अभी लंबित है। अतीत में तृणमूल कांग्रेस ने एआईएमआईएम पर अल्पसंख्यक वोटों को विभाजित कर भाजपा को लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया था। लेकिन पश्चिम बंगाल एआईएमआईएम के नेता नबीउल अंसारी ने इसे खारिज करते हुए कहा कि पार्टी हमेशा उन्हीं क्षेत्रों से उम्मीदवार उतारती है, जहां जीत की संभावना होती है और 2026 के विधानसभा चुनाव में भी यही सिद्धांत लागू होगा।
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