कोलकाता 12 जुलाई (आरएनएस)। पूर्वी भारत के रेडीमेड कपड़ा उद्योग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए कोलकाता के साइंस सिटी में आज से एक बड़े व्यापारिक महाकुंभ की शुरुआत हुई। पश्चिम बंगाल गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन (डब्ल्यूबीजीएमडीए) द्वारा आयोजित 60वें गारमेंट बायर्स एंड सेलर्स मीट एवं बी2बी एक्सपो का भव्य शुभारंभ किया गया। 12 से 14 जुलाई तक चलने वाले इस तीन दिवसीय आयोजन में उद्योग जगत के दिग्गजों का जमावड़ा लगा है। आयोजकों का अनुमान है कि इस एक्सपो के जरिए थोक स्तर पर लगभग 1,600 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड कारोबार होने की पूरी संभावना है। यह एक्सपो करीब दो लाख वर्ग फुट के विशाल क्षेत्र में आयोजित किया गया है।
इस मंच पर बच्चों, पुरुषों और महिलाओं के रेडीमेड परिधानों की एक से बढ़कर एक विस्तृत श्रृंखला प्रदर्शित की जा रही है। इसे पूर्वी भारत का सबसे बड़ा बी2बी गारमेंट व्यापारिक मंच माना जाता है, जहां कपड़ा निर्माता, थोक व्यापारी, खुदरा विक्रेता और अंतरराष्ट्रीय स्तर के ब्रांड एक ही जगह पर नए बिजनेस पार्टनर तलाश रहे हैं।
उद्घाटन समारोह में पश्चिम बंगाल भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद शमिक भट्टाचार्य, राज्य के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री तापस रॉय, नगर मामलों एवं शहरी विकास राज्य मंत्री उमेश राय, भाजपा के संयुक्त कोषाध्यक्ष विद्यासागर मंत्री, राजस्थान विधानसभा के पूर्व सदस्य राजेंद्र सिंह राठौड़, विधायक दिलीप सिंह और विधायक रितेश तिवारी सहित कई जनप्रतिनिधि एवं उद्योग जगत की प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं।
डब्ल्यूबीजीएमडीए के अध्यक्ष हरि किशन राठी ने इस आयोजन को एसोसिएशन की यात्रा का एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि 1,000 से अधिक ब्रांड्स और खरीदारों की इस भागीदारी से न केवल नए व्यापारिक अवसर पैदा होंगे, बल्कि पश्चिम बंगाल के गारमेंट और वस्त्र उद्योग को एक नई और मजबूत गति मिलेगी।
एसोसिएशन के मानद सचिव देवेंद्र बैद ने इस बात पर जोर दिया कि गारमेंट सेक्टर रोजगार देने के मामले में देश के सबसे बड़े क्षेत्रों में से एक है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस तीन दिवसीय एक्सपो से होने वाला 1,600 करोड़ का कारोबार राज्य की अर्थव्यवस्था और कपड़ा उद्योग के विकास को और अधिक मजबूती प्रदान करेगा। रेडीमेड गारमेंट उद्योग का प्रमुख प्रतिनिधि माने जाने वाले ‘डब्ल्यूबीजीएमडीएÓ की स्थापना वर्ष 1962 में हुई थी। वर्तमान में इस संगठन से 570 से अधिक प्रमुख सदस्य जुड़े हुए हैं, जो पूर्वी भारत के व्यापार को बढ़ाने में लगातार सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

