Óओटपी या एपीके फाइल मांगने वालों से सावधान रहेंÓ
जगदीश यादव
कोलकाता 20 नवंबर (आरएनएस)। मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के नाम पर साइबर ठग तमाम निरीह लोगों को अपना शिकार बना चुके हैं। पोर्ट अंचल के मटियाबुर्ज व गार्डेनरीच जैसे इलाकों में उक्त तरह की शिकायतें देखने को मिल रही है। आरोप है कि, साइबर ठग या अपराधी कहे, वह लोग चुनाव कर्मी यानी खुद को सरकारी कर्मचारी बताकर आमलोगों कॉल करते हैं और एसआईआर फॉर्म अपडेट करने के बहाने लोगों से ओटीपी मांगते हैं या संदिग्ध फाइल डाउनलोड कराते हैं, जिसमें खतरनाक मालवेयर होता है। अधिकारिक सूत्रों के अनुसार यह मालवेयर मोबाइल में सेव फोटो, संपर्क, एसएमएस, बैंकिंग ऐप, सोशल मीडिया और यूपीआई लॉगिन जैसी महत्वपूर्ण जानकारी चोरी कर सकता है। वैसे साइबर मामलों के जानकार इसे गंभीर साइबर खतरा बताते हुए लोगों को सतर्क रहने की अपील कर रहे हैं। साइबर मामलों के जानकारों का कहना है कि, एसआईआर फॉर्म में मोबाइल नंबर देना सुरक्षित है, लेकिन किसी अनजान कॉल, व्हाट्सऐप या एसएमएस पर मिला ओटीपी किसी भी व्यक्ति को न बताएं। न ही किसी अज्ञात लिंक या एपीके फाइल को डाउनलोड करें। चुनाव आयोग या फिर कोई भी सरकारी विभाग कॉल या मैसेज के माध्यम से ओटीपी नहीं मांगता और न ही कोई ऐप इंस्टॉल करने का निर्देश देता है। वैसे जानकारों ने बताया कि, साइबर ठग इन दिनों तमाम लोगों के एसआईआर फार्म से संबंधित जानकारी इकट्टा कर रहें है और फिर उसका इस्तेमाल लोगों को चूना लगाने में कर रहे हैं। वैसे ठोड़ा सा सतर्क व्यक्ति तो यह समझ जाता है कि कुछ न कुछ गड़बड़ है लेकिन , साक्षरता के अभाव में एसआईआर की हड़बड़ी या फिर घबड़ाहट में लोग साइबर ठगों के चक्कर में फंस रहे हैं और उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा है। बता दे कि बीते दिनों राज्य पुलिस के द्वारा लोगों को अलर्ट किया गया है। कोलकाता पुलिस ने अपने फेसबुक पेज पर चुनाव आयोग का एक बयान साझा किया जिसमें कहा गया आयोग ऑफिस से कभी भी एसआईआर से जुड़े कार्य के लिए किसी तरह का ओटीपी लोगों से नहीं मांगा जाता है। बहरहाल जो भी हो लेकिन महानगर के कुछ लोगों से बात करने पर उन्होंने बताया कि, एसआईआर के नाम पर सइबर ठगी को रोकने के लिए राज्य सरकार व पुलिस को व्यापक स्तर पर जागरुकता अभियान चलाना चाहिए।
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