रायपुर, 21 अगस्त (आरएनएस)। स्वास्थ्य विभाग ने इलाज के दौरान एचआईवी संक्रमित मरीजों की गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए नई गाइडलाइन जारी कर दी है। यह निर्देश तुरंत प्रभाव से सभी सरकारी मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल, सिविल हॉस्पिटल, सीएचसी–पीएचसी में लागू हो गए हैं। अब किसी भी मरीज की एचआईवी स्थिति की जानकारी केवल संबंधित उपचारकर्ता डॉक्टर या नामित नियंत्रण अधिकारी तक सीमित रहेगी। रिकॉर्ड, फाइलों और कंप्यूटर डेटा में किसी प्रकार का अलग पहचान चिह्न भी नहीं रखा जाएगा। भारत सरकार के राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (नाको) की 2018 की अधिसूचना के आधार पर तैयार इन दिशानिर्देशों में कहा गया है कि एचआईवी/एड्स से पीडि़त व्यक्तियों की व्यक्तिगत, चिकित्सीय और पहचान संबंधी जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखनी अनिवार्य है। स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया ने प्रदेश के सभी स्वास्थ्य संस्थानों को इन प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन करने निर्देश दिए हैं। सर्जरी, डिलीवरी या किसी विशेष प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा कारणों से ऑपरेशन टीम को मरीज की स्थिति की जानकारी दी जा सकेगी, लेकिन मरीज का नाम उजागर नहीं किया जाएगा। इसके अलावा, रोगी की स्थिति से जुड़ी जानकारी केवल आवश्यक चिकित्सा टीम तक सीमित रखने के निर्देश हैं। किसी भी तरह का खुलासा, चर्चा या सार्वजनिक प्रसार सख्त वर्जित है। संबंधित दस्तावेज और रिकॉर्ड सुरक्षित स्थान पर रखे जाएंगे और केवल अधिकृत अधिकारी की अनुमति से ही उपलब्ध कराए जाएंगे। गोपनीयता भंग होने पर संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। संक्रमण रोकथाम के लिए सभी स्वास्थ्यकर्मियों को यूनिवर्सल प्रीकॉशन का पालन करना अनिवार्य किया गया है। रक्त, सुई, ब्लेड या शारीरिक द्रवों के संपर्क से बचाव हेतु दस्ताने, मास्क, एप्रन और सुरक्षा चश्मे का उपयोग अनिवार्य है। प्रयुक्त सुइयों को केवल नीडल डेस्ट्रॉयर या शाप्र्स कंटेनर में नष्ट करने और किसी भी सुई- ब्लेड का दोबारा उपयोग न करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा अस्पतालों में सभी उपकरणों की उचित स्टरलाइजेशन प्रक्रिया अपनाने, बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट नियमों का पालन करने और स्क्रीन किए गए रक्त से ही ब्लड ट्रांसफ्यूजन करने का निर्देश दिया गया है। ऑपरेशन थिएटर, लेबर रूम और ड्रेसिंग रूम में संक्रमण नियंत्रण प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित करने के साथ इंफेक्शन कंट्रोल कमेटी को प्रत्येक माह निरीक्षण रिपोर्ट तैयार करना होगा। इस गाइडलाइन का महत्व हाल ही में आंबेडकर अस्पताल में सामने आए उस मामले के बाद और बढ़ गया है, जिसमें एक नवजात शिशु के बेड के सामने ‘एचआईवी मदरÓ का बोर्ड लगा दिया गया था। मामले के मीडिया में आने पर हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए अस्पताल प्रबंधन को पीडि़त महिला को 2 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया। अस्पताल प्रशासन ने तुरंत पालन करते हुए अगले ही दिन राशि का चेक महिला को सौंप दिया।
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