वाशिंगटन, 23 अपै्रल। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने देश की जन्मजात नागरिकता की कानूनी सुविधा पर सवाल उठाया है और भारत-चीन समेत अन्य देशों को नरक कहा है। ट्रंप ने यह विवादित टिप्पणी ट्रुथ पर साझा एक पत्र में की है, जिसमें जन्मजात नागरिकता को लेकर चल रही बहस को केंद्र में रखा गया है। पत्र में दावा है कि यह नीति आप्रवासियों को अपने बच्चों के लिए नागरिकता प्राप्त करने और परिवार बसाने में सक्षम बनाती है।
ट्रंप ने पत्र में अमेरिकी संविधान को लेकर कहा कि संविधान हवाई यात्रा से पहले लिखा गया था। उन्होंने लिखा, आप कह सकते हैं, ये कुछ तर्क कितने रेलिवेंट हैं जब लोग अपनी गर्भावस्था के नौवें महीने में हवाई जहाज से यहां आ रहे हैं, यहां एक बच्चा तुरंत नागरिक बन जाता है, और फिर वे परिवार को चीन-भारत या दुनिया की अन्य नरक जैसी जगह से ले आते हैं। यह देखने के लिए आपको दूर जाने की जरूरत नहीं।
ट्रंप ने पत्र में लिखा कि अमेरिका के किसी भी शहर से आगे जाकर यह देखने की ज़रूरत नहीं है कि इस देश पर जन्मजात नागरिकता का क्या असर हुआ है। उन्होंने लिखा कि उन्हें बहुत अजीब लगता है जब समझदार, स्मार्ट वकील जन्मजात नागरिकता की वकालत करते हैं। उन्होंने लिखा, इसीलिए मैंने अपने सोशल चैनल पर एक पोल डाला जहां मैंने कहा, जन्मजात नागरिकता पर नेशनल वोट होना चाहिए। इसे वकीलों के हाथों में नहीं दिया जाना चाहिए।
ट्रंप ने पत्र में अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन की भी आलोचना की है और उस पर आरोप लगाया है कि वह ऐसी नीतियों का समर्थन करती है जिनसे कथित तौर पर अमेरिकी नागरिकों की तुलना में अवैध अप्रवासियों को लाभ होता है। उन्होंने संगठन को आपराधिक संस्था बताया है और सुझाव दिया कि इसे संगठित अपराध वाले कानूनों के तहत निशाना बनाया जाना चाहिए। पत्र में स्वास्थ्य-सार्वजनिक सेवाओं और नौकरियों के दुरुपयोग पर भी चिंता जताई गई है।
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