0 शिक्षक संघ ने जताया विरोध
रायपुर, 21 अगस्त (आरएनएस)। प्रदेश में आवारा कुत्तों पर नियंत्रण को लेकर छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा जारी नई गाइडलाइन पर शिक्षक समुदाय ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद स्कूल परिसरों में कुत्तों की एंट्री रोकने की जिम्मेदारी सीधे प्राचार्यों पर डाल दी गई है, जिसे शिक्षक संघ ने अनुचित, अव्यावहारिक और अतिरिक्त बोझ बताते हुए वापस लेने की मांग की है। दरअसल, देशभर में कुत्तों के काटने की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद राज्य सरकार ने स्कूल, अस्पताल, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर कुत्तों की आवाजाही रोकने के लिए कई विभागों को स्पष्ट जिम्मेदारियों के साथ नया आदेश जारी किया है। आदेश के अनुसार, 7 दिन के भीतर ऐसे स्थानों की पहचान कर फेंसिंग, गेट और सुरक्षा उपाय सुनिश्चित किए जाएंगे, जहां से आवारा कुत्ते परिसर में घुसते हैं। साथ ही प्रत्येक स्थल के लिए एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति भी अनिवार्य की गई है। अभियान के पहले चरण में—स्कूल प्राचार्य, अस्पतालों के अधीक्षक/सीएमओ, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन प्रबंधन को अपने परिसर के प्रवेश मार्गों और खुली जगहों का निरीक्षण कर कुत्तों की एंट्री रोकने के उपाय करने होंगे। आवश्यकता पडऩे पर अन्य विभागों से सहयोग भी लिया जा सकेगा। नोडल अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि कुत्ते परिसर के भीतर न प्रवेश करें और आसपास भी न भटकें।
विभागवार जिम्मेदारियां भी तय की गई हैं:
पशुधन विकास विभाग: आवारा कुत्तों की नसबंदी और आश्रय स्थलों के लिए पशु चिकित्सकों की नियुक्ति। स्वास्थ्य विभाग: सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में एंटी रैबीज वैक्सीन व इम्यूनोग्लोबुलिन की पर्याप्त उपलब्धता। लोक निर्माण विभाग (क्कङ्खष्ठ): प्रवेश मार्गों की पहचान, फेंसिंग, बाउंड्रीवॉल और गेट निर्माण। शिक्षा विभाग: स्कूलों में बच्चों और स्टाफ की सुरक्षा का प्रबंधन तथा काटने की स्थिति में तत्काल इलाज की व्यवस्था। नगर निगम/नगर पालिका/पंचायत: हर तीन महीने में निरीक्षण, कुत्तों की पकड़ व नसबंदी, डॉग शेल्टर, चिकित्सक और देखभाल स्टाफ की व्यवस्था तथा हर वार्ड में भोजन स्थल तय करना। खेल मैदान प्रबंधन: सुरक्षा कर्मी या ग्राउंड स्टाफ तैनात कर कुत्तों की एंट्री रोकना। शिक्षक संघ का कहना है कि स्कूलों के पास पहले से ही अनेक प्रशासनिक कार्य हैं, ऐसे में आवारा कुत्तों को रोकने का दायित्व प्राचार्यों पर डालना अनुचित है। संघ ने शासन से अपील की है कि इस जिम्मेदारी को हटाकर इसे स्थानीय निकायों या संबंधित विभागों को सौंपा जाए।
सरकार का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत छात्रों और नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि है, इसलिए विभागों को मिलकर इस अभियान को प्रभावी बनाना होगा।
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