भारतीय ज्ञानपीठ के महाप्रबंधक आरएन तिवारी ने उन्हें यह सम्मान पत्र सौंपा
रायपुर, 22 नवम्बर (आरएनएस)। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के हिंदी के प्रख्यात साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल को आज उनके निवास पर आयोजित एक कार्यक्रम में 59वां ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया गया। भारतीय ज्ञानपीठ के महाप्रबंधक आरएन तिवारी ने उन्हें यह सम्मान पत्र सौंपा। इस दौरान साहित्य, कला और संस्कृति जगत की अनेक प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं।
88 वर्षीय शुक्ल हिंदी के 12वें लेखक हैं, जिन्हें यह सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान दिया गया है। छत्तीसगढ़ से यह पुरस्कार पाने वाले वह पहले साहित्यकार हैं। इस मौके पर वक्ताओं ने साहित्यकार शुक्ल के रचनात्मक कार्यों और हिंदी साहित्य को मिले उनके विशिष्ट योगदान की जमकर प्रशंसा की।
हिंदी साहित्य को दी ऊंचाई
शुक्ल आधुनिक हिंदी साहित्य के चुनिंदा कथाकारों और कवियों में से एक हैं , जो अपनी विशिष्ट भाषा, शांत गहनता और अद्भुत कल्पनाशीलता के बल पर साहित्य को नई ऊंचाई दी है ।
उनकी चर्चित कृतियां
शुक्ल की प्रमुख कृतियों में नौकर की कमीज,खिलेगा तो देखेंगे और ‘दीवार में खिड़की रहती थीÓ, लगभग जयहिन्द जैसे उपन्यासों और कई उल्लेखनीय कविता संग्रह ,समाज के सूक्ष्म अनुभवों ,साधारण मनुष्यों की दुनिया और जीवन की विसंगतियों को अत्यंत मार्मिक ढंग से प्रस्तुत करती हैं। उनकी लेखन शैली धीमी रोशनी में चमकते सत्य की माना जाता है है।
अनूठा और सादगी भरा लेखन
उन्हें हिंदी साहित्य के क्षेत्र में उनके अनूठे और सादगी भरे लेखन के लिए जाना जाता है। वर्ष वर्ष 1979 में नौकर की कमीज नाम से आए उनका उपन्यास पर फि़ल्मकार मणिकौल ने 1999 में फिल्म बन चुके हैं। यह फिल्म ‘केरल अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहÓ में सम्मानित की गई थी। शुक्ल के दूसरे उपन्यास दीवार में एक खिड़की रहती थी को साहित्य अकादमी पुरस्कार मिल चुका है।
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