फरीदाबाद 22 Nov, (Rns): दिल्ली ब्लास्ट के बाद जांच के घेरे में आई अल-फलाह यूनिवर्सिटी को लेकर चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। 12 से अधिक स्टाफ सदस्यों से हुई पूछताछ में कई बयानों में बड़े विरोधाभास मिले हैं। जानकारी यह भी मिली है कि धमाके वाले दिन कई डॉक्टर अचानक गायब हो गए, जबकि 10 नवंबर की रात से ही कई फैकल्टी संदिग्ध हालात में अंडरग्राउंड हो गईं।
जांच एजेंसियों को पता चला है कि कई संदिग्धों के सोशल मीडिया अकाउंट—फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स—अचानक डिएक्टिवेट कर दिए गए। कई के मोबाइल फोन भी स्विच ऑफ मिले। इससे आतंकी साजिश में और लोगों की संलिप्तता पर शक और गहरा गया है। बताया जा रहा है कि धमाके के बाद कई डॉक्टर और स्टाफ बिना सूचना के यूनिवर्सिटी छोड़कर चले गए। कुछ के बैंक खातों में 2 लाख रुपये से अधिक की रकम पाई गई, जिन्हें फिलहाल फ्रीज कर दिया गया है। फंड ट्रेल, कॉल डिटेल और चैट हिस्ट्री की जांच तेज कर दी गई है।
लैब से ‘प्रोजेक्ट’ के नाम पर होती थी कैमिकल चोरी
जांच में बड़ा खुलासा यह भी हुआ है कि आरोपी डॉक्टर—मुजम्मिल, उमर और शाइन—छात्रों के प्रोजेक्ट और मेडिकल पढ़ाई के नाम पर लैब से कैमिकल चुपचाप निकालते थे। यूनिवर्सिटी की लैब जांच में पता चला कि कई ग्लासवेयर, कैमिकल टेस्टिंग किट, अमोनियम नाइट्रेट सहित कई सामग्री रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रही है। कई कैमिकल किट और अन्य लैब सामग्री बिना किसी एंट्री के गायब मिली। आरोपियों ने छोटे-छोटे हिस्सों में इन्हें अपने बैग और वाहनों की डिग्गी में रखकर कैंपस से बाहर ले जाया। अमोनियम नाइट्रेट की टेस्टिंग में इस्तेमाल होने वाले विभिन्न कैमिकल भी गायब पाए गए।
एनआईए कर रही गहराई से पूछताछ
गिरफ्तार आतंकियों से एनआईए यह पता लगाने में जुटी है कि लैब से कौन सा कैमिकल कब निकाला गया, इसका इस्तेमाल कहां होता था और इस पूरी प्रक्रिया में निर्देश किसके थे। एजेंसी यह भी जांच कर रही है कि क्या विदेशी हैंडलर्स कैमिकल्स की मात्रा और बम बनाने की पूरी तकनीक बताते थे।

