खैरागढ़, 22 नवम्बर (आरएनएस)। खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले में तीन दिनों तक चले ‘खैरागढ़ महोत्सव 2025Ó का शुक्रवार रात आकर्षक समापन हुआ। इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय का परिसर देश–विदेश से आए कलाकारों के सुर और ताल से सराबोर हो गया, जहां बड़ी संख्या में उपस्थित दर्शक देर रात तक कार्यक्रमों में डूबे रहे। समापन अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका, रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल और खैरागढ़ की विधायक यशोदा वर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। उद्घाटन दिवस पर अमेरिका के प्रोफेसर बेंजामिन बून और कुलपति प्रो. लवली शर्मा की विशेष प्रस्तुतियों के साथ तबला वादक पं. गौरीशंकर कर्मकार, वृंदावन की गायिका विदुषी आस्था गोस्वामी और सोनहा बदर दल की प्रस्तुति को दर्शकों ने खूब सराहा। तीन दिनों में हजारों लोगों ने महोत्सव में पहुंचकर उपस्थिति दर्ज कराई। समापन समारोह में सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि संस्कृति मंत्री के रूप में इस महोत्सव की शुरुआत कर पाना उनके लिए गर्व की बात रही है और वर्षों बाद पुन: इससे जुड़कर वे प्रसन्न हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए सहयोगात्मक प्रयासों पर जोर दिया। इसी दौरान कुलपति डॉ. लवली शर्मा ने विश्वविद्यालय से संबंधित व्यवस्थाओं के प्रस्ताव राज्यपाल को सौंपे, जिनके त्वरित समाधान का आश्वासन लिया गया। अंतिम दिन शास्त्रीय और लोक कला का शानदार मेल दिखाई दिया। पं. हरीश तिवारी की गायकी, पद्मभूषण पं. बुधादित्य मुखर्जी का सितार, व्योमेश शुक्ला समूह की ‘राम की शक्ति पूजाÓ तथा डॉ. पीसीलाल यादव के नेतृत्व में दूधमोंगरा की लोक-शैली ने दर्शकों को देर रात तक बांधे रखा। महोत्सव के दूसरे दिन मुख्य अतिथि के रूप में राजा आर्यव्रत सिंह ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। उन्होंने अपने पूर्वजों द्वारा विश्वविद्यालय को दिए गए ऐतिहासिक योगदान का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों को समर्पण के साथ कला साधना की प्रेरणा दी। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. (डॉ.) लवली शर्मा ने की और उनके नवाचारों के लिए आत्मनिर्भर खैरागढ़ अभियान की ओर से सम्मान प्रदान किया गया। सितार, सरोद, वायलिन और तबला की सामूहिक प्रस्तुतियों ने मंच को और अधिक प्रभावशाली बना दिया। संगीत, ताल, राग और लोक परंपराओं से सजा यह महोत्सव फिर से यह रेखांकित कर गया कि खैरागढ़ कला एवं संगीत की परंपरा को नई दिशा और ऊंचाई देने की क्षमता रखता है।
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