बिलासपुर, 22 नवम्बर (आरएनएस)। जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के प्रमुख अमित बघेल के खिलाफ कथित भड़काऊ बयानबाजी के आरोपों पर दाखिल याचिका पर हाई कोर्ट ने हस्तक्षेप से इंकार कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब किसी मामले में आपराधिक जांच जारी हो, तो न्यायालय न तो जांच प्रक्रिया में दखल दे सकता है और न ही गिरफ्तारी के आदेश देने का अधिकार रखता है। यह याचिका रायपुर के अवंती विहार निवासी अमित अग्रवाल ने स्वयं प्रस्तुत की थी, जिसमें बघेल की तत्काल गिरफ्तारी, पुलिस जांच की निगरानी और निर्धारित समयसीमा में कार्रवाई की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता का आरोप था कि बघेल अलग-अलग समुदायों—सिंधी, जैन और अग्रवाल—के प्रति आपत्तिजनक और उकसाने वाले बयान दे रहे हैं तथा कई स्थानों पर दर्ज एफआईआर के बावजूद सरकार कार्रवाई में देरी कर रही है। राज्य सरकार की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने दलील दी कि एफआईआर दर्ज होने के बाद जांच विधिसम्मत तरीके से आगे बढ़ रही है और लापरवाही या संरक्षण के आरोप गलत हैं। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने कहा कि जांच की निगरानी, तरीका तय करना या वरिष्ठ स्तर से निर्देश देना अदालत के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता और ऐसा करना क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन का माइक्रो मैनेजमेंट माना जाएगा। इस आधार पर अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया।
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