लखनऊ,22 नवंबर (आरएनएस)। रोजग़ार दो–सामाजिक न्याय दोÓ पदयात्रा अपने ग्यारहवें दिन प्रयागराज में अभूतपूर्व जनसमर्थन के साथ आगे बढ़ी। सुबह 10 बजे वृंदावन वाटिका, चौपाई बाग, मऊ अहिमा से शुरू हुई यात्रा जैसे-जैसे गंगा डिग्री कॉलेज, सोरांव की ओर बढ़ी, रास्ते भर छात्रों, नौजवानों, महिलाओं, बुजुर्गों और यहां तक कि गांवों के स्कूली बच्चों ने भी फूल-मालाओं से संजय सिंह का स्वागत किया। पदयात्रा पूरी तरह जनआन्दोलन का रूप लेती दिखाई दी।सोरांव पहुँचे सांसद संजय सिंह के सामने स्थानीय समस्याएँ भी रखी गईं। बुज़ुर्ग दिव्यांग रामकुमार ने फर्जी विद्युत बिल का मुद्दा उठाया, जबकि पेंशनधारी रामसुखी पटेल ने बताया कि जीवित होने के बावजूद उनकी पेंशन मृत दिखाकर बंद कर दी गई है। दोनों शिकायतें सुनकर संजय सिंह ने समाधान का भरोसा दिलाया। वहीं, लगातार जुड़ते युवाओं और छात्रों ने “रोजग़ार दो” के नारों के साथ माहौल को ऊर्जावान कर दिया।पदयात्रा के दौरान संजय सिंह ने बेरोजग़ारी को उत्तर प्रदेश की सबसे गंभीर समस्या बताते हुए कहा कि सरयू से संगम तक 12 से 24 नवंबर की यह पदयात्रा इसलिए निकाली जा रही है क्योंकि प्रदेश का युवा भर्ती घोटालों, पेपर लीक और परीक्षाओं के बार-बार रद्द होने से टूट चुका है। प्रयागराज जैसे शिक्षा केंद्र में लाखों छात्र रोजगार की उम्मीद लेकर आते हैं, लेकिन सरकार की नीतिगत विफलता उन्हें निराशा के सिवा कुछ नहीं देती। उन्होंने कहा कि जो प्रयागराज कभी पूर्व का ऑक्सफोर्ड कहलाता था, वहां आज योग्यता का कोई मूल्य नहीं बचा। सरकार युवाओं को योग्यता पर लाठीचार्ज, मेहनत पर ठगी और सपनों पर ताला लगाने का काम कर रही है।संजय सिंह ने कहा कि पिछले पाँच वर्षों में प्रयागराज में शांतिपूर्ण छात्र आंदोलनों का दमन हुआ है—चाहे पीसीएस में धांधली के विरोध की आवाज़ हो, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रों का आंदोलन हो या लोक सेवा आयोग के बाहर अभ्यर्थियों का प्रदर्शन। बार-बार परीक्षाएं रद्द होने से हताश गोंडा के एक युवक द्वारा जान देने की घटना पूरे तंत्र की संवेदनहीनता को उजागर करती है। बी.एड-टीईटी, आरआरबी और अन्य भर्तियों में अव्यवस्था ने सिद्ध कर दिया है कि सरकार युवाओं की आवाज़ दबाने में अधिक व्यस्त है।उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले पाँच वर्षों में सरकार ने भर्ती प्रणाली को पूरी तरह घोटालों में धकेल दिया है—पीसीएस, यूपी पुलिस, शिक्षक भर्ती, पीईटी, टीईटी से लेकर रेलवे तक कोई भी परीक्षा पारदर्शिता से नहीं हुई। माता-पिता कर्ज लेकर बच्चों को पढ़ाते हैं, लेकिन पेपर लीक उनकी मेहनत मिट्टी में मिला देता है। इसी टूटे भरोसे को वापस दिलाने के लिए यह पदयात्रा स्रद्गष्द्बह्यद्ब1द्ग संघर्ष बनकर खड़ी हुई है।पदयात्रा में आर्थिक मुद्दों को भी प्रमुखता मिली। संजय सिंह ने कहा कि भाजपा की आर्थिक नीतियों ने किसानों, बुनकरों, लघु व कुटीर उद्योगों को तबाह कर दिया है। महंगाई, बढ़ते बिजली दर, और बुलडोजर कार्रवाई ने छोटे व्यापारों की रीढ़ तोड़ दी है। रोजगार की तलाश में भटकता नौजवान पहले से अधिक असुरक्षित हो चुका है, इसलिए यह पदयात्रा उसके अधिकारों की आवाज़ है।उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा शासन में दलितों, पिछड़ों और वंचितों पर अत्याचार बढ़े हैं। सरकार मनुवादी सोच थोपने की कोशिश कर रही है, जबकि यह देश बाबा साहेब अंबेडकर के संविधान से ही संचालित होगा। ‘रोजग़ार दो–सामाजिक न्याय दोÓ पदयात्रा समाज के उन वर्गों की आवाज़ है जिन्हें वर्षों से हाशिए पर धकेला गया है।अंत में संजय सिंह ने कहा कि भाजपा समाज को नफरत की आग में झोंक रही है, जबकि भारत की नींव मोहब्बत और भाईचारे पर टिकी है। आम आदमी पार्टी उन सभी शक्तियों के खिलाफ संघर्षरत है जो समाज को बांटने की राजनीति करती हैं। पदयात्रा से लगातार जुड़ती जनता यह साफ संदेश दे रही है—युवा रोजगार चाहते हैं, नफरत नहीं; न्याय चाहते हैं, भेदभाव नहीं।
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