रिश्वत न देना भारी पड़ गया
सुलतानपुर,22 नवंबर (आरएनएस)। एक ओर सरकारें मंचों पर ठेका कर्मचारियों के भविष्य सुधार अभियान के बड़े-बड़े वादे करती दिखाई देती हैं। निगम बन रहे हैं, योजनाएँ तैयार हो रही हैं, और घोषणाएँ इतनी कि पोस्टर भी थक जाए। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ बौर ही बयां कर रही है।
सुल्तानपुर ब्लड बैंक में पिछले 9 वर्षों से कार्यरत वार्ड बॉय संदीप मिश्रा का नवीनीकरण अचानक रोक दिया गया और वजह? संदीप का आरोप है कि उन्होंने रिश्वत देने से इनकार कर दिया। संदीप मिश्रा के मुताबिक मै 9 साल से ब्लड बैंक में वार्ड बॉय की ड्यूटी कर रहा हूँ। न कोई शिकायत, न कोई विवाद। फिर भी कंपनी ने मेरा नवीनीकरण नहीं किया। बाकी सभी लोगों का नाम सूची में आ गया, सिर्फ मेरा नहीं। जब मैंने कारण पूछा तो इशारों में टोकन की बात कही गई। मेरे पास रिश्वत देने का पैसा नहीं था, इसलिए मेरा नाम काट दिया गया। संदीप बताते हैं कि उन्होंने लखनऊ जाकर कंपनी के ऑफिस में अपना शैक्षिक प्रमाणपत्र, अनुभव प्रमाणपत्र, सभी जरूरी दस्तावेज जमा किए। फिर भी उन्हें सूची से बाहर कर दिया गया। अपनी स्थिति बताते हुए संदीप की आवाज तक टूट जाती है दो छोटे बच्चे हैं, परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है। 35 साल की उम्र में नई नौकरी भी आसानी से नहीं मिलती। मैं मानसिक रूप से टूट चुका हूँ। कई दिनों से सो नहीं पा रहा हूँ। अगर ऐसे ही स्थिति रही तो किसी दिन मेडिकल कॉलेज गेट पर आत्महत्या करने की नौबत आ जाएगी। उनका यह बयान जिले की ठेका प्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा करता है क्या ठेका रोजगार अब मेहनत और अनुभव से नहीं, बल्कि ‘टोकनÓ से तय होता है?
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